Saturday, April 18, 2026
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राष्ट्रीय विज्ञान गणित कठपुतली फिल्म महोत्सव के लिए प्रथम वैश्विक कार्यशाला का वैश्विक शुभारंभ हुआ

आगामी आने वाले 30 नवंबर 2025 को होने वाली अंतरराष्ट्रीय विज्ञान गणित कठपुतली फिल्म महोत्सव एक ग्लोबल कार्यशाला के रूप में वैश्विक शुभारंभ किया गया । देशभर की छात्र और शिक्षक जिन्हें कठपुतली की द्वारा विज्ञान और गणित समझने में रुचि है वह सभी इसमें भाग ले सकेंगे और उनको आमंत्रित भी किया गया है। यह अनूठा आयोजन कठपुतली कला के प्रति जुनून और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करता है

नेशनल काउंसिल पर रिसर्चर टीचर साइंटिस्ट ऑफ इंडिया एवं नेशनल काउंसिल ऑफ स्टूडेंट साइंटिस्ट इंडिया, दासा इंडिया त्रिपुरा के संयुक्त प्रयास से 2025 कठपुतली फिल्म महोत्सव और कार्यशाला का वैश्विक शुभारंभ आयोजन में नेशनल काउंसिल ऑफ रिसर्चर टीचर साइंटिस्ट इंडिया के नेशनल अध्यक्ष अंजन बनिक जी द्वारा किया गया। इसमे देश की जानी मानी कठपुतली कला को शिक्षा के लिए उपयोगी बनाने के लिए एससीईआरटी दिल्ली के रिसोर्स पर्सन शिक्षिका कल्पना जी तथा कोटा से विज्ञान शिक्षा के लिए समर्पित बिगुल जैन विशेष रूप से शामिल रहे।

इस आयोजन में शामिल होने के लिए बच्चे और विद्यालय की शिक्षक शिक्षिका सभी अपनी विज्ञान और गणित की किताब की किसी भी टॉपिक को लेकर 3 मिनट का कठपुतली नाटिका बनाकर उसको मोबाइल द्वारा वीड़ियो ग्राफी करके एक फिल्म बना सकते हे और उसको

अपनी नाम पता मोबाइल नंबर स्कूल का नाम और फिल्म का नाम विज्ञान और गणित की टॉपिक का नाम लिखकर chaptertripura@gmail.com पे सितंबर महीने के अंदर भेजें। जो भी बच्चे और शिक्षक उसको भेजेंगे उनका जजमेंट होने के बाद उन्हें सर्टिफिकेट और अवार्ड से भी सम्मानित किया जाएगा और उनका फिल्म 30 नवंबर को होने वाली सर जैसी बॉस अंतरराष्ट्रीय विज्ञान गणित कठपुतली फिल्म महोत्सव में उसकी ऑनलाइन कार्यक्रम में दिखाया जाएगा। अनजन बनिक जी ने बच्चों को और टीचरों को अपनी अपनी कठपुतली नाटिका की फिल्म तुरंत भेजने की आमंत्रण रखते हुए कहा, हमें उम्मीद है कि आप इस अद्भुत आयोजन का हिस्सा बनेंगे और कठपुतली कला के प्रति अपने जुनून को साझा करेंगे।

शिक्षा में कठपुतली की भूमिका पर आपका प्रस्तुतिकरण निश्चितरूप से सराहनीय रहा यूं तो कठपुतली का इस्तेमाल भारत के अलग अलग प्रान्तो में अलग अलग पारंपरिक रूप में भारतीय किवंदतियों को छोटी छोटी कहानियों को लोकप्रिय और सस्ते माध्यम से न केवल बच्चों में बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग को जोड़ते हुये ज्ञानवर्धन का साधन रही है। वर्तमान समय में मोवाइल, टीवी ने बच्चों में एकाकीपन और चिड़‌चिडाहट पैदा की वही कठपुतली जोड़ने का प्रयास करती है। आज के युग में भी प्राचीनतम कठपुतली कला हर वार नयापन लेकर आती है। आज मुझे प्रसन्नता है कि कल्पना जी जो NCERT से जुड़ी हुयी है वे बच्चो की शिक्षा के प्रति बहुत जागरुक है, सजग है, वच्चों को सहजता से विज्ञान और गणित को सरल तरीके से प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिये आप कार्यरत है।

कठपुतली में छिपा है, पर्यावरण प्रेम, शान्ति की अनुभूति और बीच बीच में विशेष प्रकार की ध्वनि के साथ जागृति ओर आनन्द  स्टेज अपने प्रकार की अनुभूति देता है, पर्दा हटता है, पीछे एक खुवसूरत चिंत्राकन होता है जो आपको एक अलग ही दुनियों में ले जाता है-

कल्पना जी ने अपने शेडो पपेटरी में कट आउट के द्वारा प्रकृति का सुन्दर चित्रांकन किया और थोड़ी ही देर में owl के आते ही एक अलग अनुभूति के साथ कहानी का प्रारम्भ होता है, हर पात्र् अपना परिचय देते हुये, पूरे जोश के साथ, हाथ पैरों को हिलाते हुये, पक्षी चांच और परों को हिलाते हुये, पेड़ के पत्ते हवा में हिलते हुये, रोशनी के माध्यम से रात और दिन का अहसास। सभी कुछ बारीकी से समझाते हुए ।आप का अभिनन्दन।

✍️बिगुल जैन ,सेवानिवरत उप मुख्य अभियंता थर्मल

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