Saturday, April 18, 2026
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आपकी खिदमत में एक गीत पेश है- वाजिद अली ‘वाजिद’

आपकी खिदमत में एक गीत पेश है-

 

तुम नाम भूल जाओगे हमदम शराब का।

इक जाम पीके देखिए मेरे शबाब का।

 

क्या आरजू है दिल की दिलबर बताइए।

इसतरहा दूर रह के ना मुझको सताईये।।

पैग़ाम-ए-मोहब्बत तो तुम्हें दे चुकी हूं मैं।

अब इन्तजार है मुझे साजन जवाब का।

खिदमत में आपकी मेरा हुस्ऩो सिंगार है।

ये रेशमी जुल्फें ये बाहों का हार है।

ना शर्म का पर्दा हे ना कोई दीवार है।

क्या काम मोहब्बत में किसी भी हिजाब का।।

इक जाम पीके देखिए मेरे शबाब का।

 

उम्मीद को ना तोड़िये मर जाऊंगी सनम।

होके में तिनका तिनका बिखर जाऊंगी सनम।।

दिल तोड़ कर ना जाओ कुछ तो रहम करो।

कुछ तो सिला मिले मुझे इस इंतखाब का।।

इक जाम पी के देखिए मेरे शबाब का।।

 

चाहत का ये नशा है उतरता नहीं कभी।

दुनिया के ये सितम से डरता नहीं कभी।

मुझको करीब आने की जहमत तो दीजिए।।

एहसान होगा मुझ पे ये आली जनाब का।

इक जाम पीके देखिए मेरे शबाब का।

तुम नाम भूल जाओगे हमदम शराब का।

 

–वाजिद अली “वाजिद”

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