अब पाक तेरी ही वारी……
अरे पाक तेरी मक्कारी, अब नहीं बढ़ेगी यारी ।
भारत की जनता प्यारी, कछु बात हमारी न्यारी ।।
अरे पाक तेरी मक्कारी…
अब नहीं बढ़ेगी यारी….
तेने गलती किन्ही भारी, अब टूट चुकी है यारी।
करके आयौ है तैयारी, सैलानी को गोली मारी ।।
रे दुष्ट! हैजा अब तैयार, बस तेरी ही है वारी …..
अरे पाक तेरी मक्कारी…
अब नहीं बढ़ेगी यारी…..
घाटी में सैलानी आए, तुम दुष्टों ने मार गिराए ।
तुम्हें नीच कर्म क्यों भाये, लोगों ने प्राण गंवाए ।।
दुष्टों ने धर्म पूछ कर मारे, गद्दार बने हत्यारे ।
पापी टूट पड़े थे सारे,तब रोष में आकर मारे ।।
उनकी अकल गई थी मारी, अब मोदी की है वारी।
अरे दुष्ट है जा तू तैयार, अब तेरी ही है वारी…..
अरे पाक तेरी मक्कारी …..
अब टूट चुकी है यारी ……….
तू बार बार छोड़ो है, सेना ने तेरो मुँह तोड़ो है ।
दया दिखा दई भारत ने, फिर भी अटकावे रोड़ो है ।।
अरे पाक तेरी मक्कारी….
अब टूट चुकी है यारी……
तेरी एकऊ नहीं चलेगी, दाल भारत में नहीं गलेगी।
तेरी कैसे बात चलेगी, तोपों से मही हिलेगी।।
अब तोपें गरजेगी भारी, कर ले भागन की तैयारी ।
दुष्ट हैजा तू तैयार, बस तेरी ही आई वारी ।।
अरे पाक तेरी मक्कारी…
अब टूट चुकी है यारी…..
कालिख तेरे चेहरे पे लगेगो, भागत भी नहीं बनेगो ।
नापाक तेरो ये चेहरा, कीचड़ ते ही सनेगो।।
तहस नहस करने की, पूरी कर लीनी तैयारी ।
दुष्ट है जा तू तैयार, अब तेरी ही है वारी।।
अरे पाक तेरी मक्कारी…
अब टूट चुकी है यारी…..
रचना _ के. सी. राजपूत, कोटा।






