काली चरण राजपूत जी, कोटा, के प्रति दो शब्द…….
भगवद गीता उपदेश को, पढ़वाते हैं राजपूत ।
कोई तो ऐसा होना चाहिए, भारत मां का सपूत ।।
पाठक तक पहुंचाना, उनका नित्य है काम ।
आपको याद दिलाते, कह कर सीता राम।।
गद्य पद्य दोनों लिखें, गीता का देते सार ।
प्रसन्न मन रहते सदा, है आकर्षक व्यवहार ।।
पांच पुस्तकें प्रकाशित हुईं, यात्रा अभी जारी है।
अगली पुस्तक लिखने की, जारी तैयारी है ।।
एटा की तहसील जलेसर, लोधी पुर है गांव ।
सुबह शाम प्रभु ध्यान में, प्रभु ही करते छांव।।
दिन, दस नवंबर का था,उन्नीस सत्तावन का साल ।
जन्म समय काली चरण ने, पाया उन्नत भाल ।।
तेहि पिता मान सिंह थे,और खरगो देवी माता ।
उनकी गोदी में पलकर, के. सी. धन्य हो जाता ।।
शिक्षा स्नातक और डिप्लोमा, सामान्य रही पढ़ाई ।
प्रभु के आशीर्वाद से ही, सारी शिक्षा पाई ।।
रेल सेवा बत्तीस वर्ष कर, पाया है आराम ।
अब तो काम एक ही, बस ध्याते हैं श्रीराम ।।





