Tuesday, June 2, 2026
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ग़ज़ल -शकूर अनवर 

ग़ज़ल

शकूर अनवर

*

ऐसा कितना कमा लिया उसने।

ख़ुद को मिट्टी बना लिया उसने।।

*

वो उजाले फ़रेब* ही देंगे।

जिन उजालों को पा लिया उसने।।

*

हम तो सब कुछ लुटा के बैठ गये।

अपना सब कुछ बचा लिया उसने।।

*

ज़ुल्म की भूख क्यूँ नहीं मिटती।

सारी दुनिया को खा लिया उसने।।

*

दूर ही का सलाम था उससे।

फिर भी अपना बना लिया उसने।।

*

ये चराग़ों की बददुआऍं थीं।

अपने घर को जला लिया उसने।।

*

उसने ऐसा भी क्या किया “अनवर”।

फिर भी सिक्का जमा लिया उसने।।

*

शकूर अनवर

फ़रेब*धोखा

9460851271

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