ग़ज़ल
शकूर अनवर
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ऐसा कितना कमा लिया उसने।
ख़ुद को मिट्टी बना लिया उसने।।
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वो उजाले फ़रेब* ही देंगे।
जिन उजालों को पा लिया उसने।।
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हम तो सब कुछ लुटा के बैठ गये।
अपना सब कुछ बचा लिया उसने।।
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ज़ुल्म की भूख क्यूँ नहीं मिटती।
सारी दुनिया को खा लिया उसने।।
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दूर ही का सलाम था उससे।
फिर भी अपना बना लिया उसने।।
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ये चराग़ों की बददुआऍं थीं।
अपने घर को जला लिया उसने।।
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उसने ऐसा भी क्या किया “अनवर”।
फिर भी सिक्का जमा लिया उसने।।
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शकूर अनवर
फ़रेब*धोखा
9460851271
ग़ज़ल -शकूर अनवर






