Saturday, April 18, 2026
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भारत की नारी…. देश की नारियों को समर्पित-कालीचरण राजपूत

भारत की नारी……

देश की नारियों को समर्पित…

 

वनिता कहो या क्षत्राणी, यह भारत वर्ष की नारी है ।

बालाएं सब जाग उठीं, अब नारी की ही बारी है ।।

जल, थल और नभ में, नारी ने हथियार उठाए हैं ।

जो भर अहंकार में आए थे, नारी ने इन्हें छकाए हैं ।।

इनसे आकाश न छूटा है, विजय पा रहीं उस पर भी ।।

नित प्रति नई सोच से वे, जादू सा करती उस पर भी ।।

राफेल, मिराज, चिनूक न कोई फाइटर इनसे छूटा है ।

कामिनी के अदम्य साहस से, दर्प चीन का टूटा है ।।

मौसम कोई सा भी हो, इनको न झुका पाएगा ।

भारत की नारी का जय घोष, बच्चा बच्चा गाएगा ।।

अत्यंत विकट परिस्थिति में, भारत की लाज बचाएंगी ।

यह रण वीरों के ही स्वर में, गीत विजय के जाएंगी ।।

पी ओ के अक्साई चिन, सबको लेने की ठानी है ।

इतिहास गवाही देता है, नारी ने हार न मानी है ।।

धारा 370 की तरह, अक्साई रहेगा न पी ओ के ।

दोनों ही भारत के होंगे, होगा तब ओके ओके ।।

जय घोष उठेगा जोरों से, बच्चा-बच्चा मुस्कायेगा ।

पी ओ के का जन-जन भी, बंधन से मुक्ति पाएगा ।

विश्व कहेगा नारी को, तुम भारत की ही वाणी हो ।

अदम्य साहस है तुम में,अजेय वीर क्षत्राणी हो ।।

अजेय वीर क्षत्राणी हो….

अजेय वीर क्षत्राणी हो ….

 

के. सी. राजपूत, कोटा ।

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