भारत की नारी……
देश की नारियों को समर्पित…
वनिता कहो या क्षत्राणी, यह भारत वर्ष की नारी है ।
बालाएं सब जाग उठीं, अब नारी की ही बारी है ।।
जल, थल और नभ में, नारी ने हथियार उठाए हैं ।
जो भर अहंकार में आए थे, नारी ने इन्हें छकाए हैं ।।
इनसे आकाश न छूटा है, विजय पा रहीं उस पर भी ।।
नित प्रति नई सोच से वे, जादू सा करती उस पर भी ।।
राफेल, मिराज, चिनूक न कोई फाइटर इनसे छूटा है ।
कामिनी के अदम्य साहस से, दर्प चीन का टूटा है ।।
मौसम कोई सा भी हो, इनको न झुका पाएगा ।
भारत की नारी का जय घोष, बच्चा बच्चा गाएगा ।।
अत्यंत विकट परिस्थिति में, भारत की लाज बचाएंगी ।
यह रण वीरों के ही स्वर में, गीत विजय के जाएंगी ।।
पी ओ के अक्साई चिन, सबको लेने की ठानी है ।
इतिहास गवाही देता है, नारी ने हार न मानी है ।।
धारा 370 की तरह, अक्साई रहेगा न पी ओ के ।
दोनों ही भारत के होंगे, होगा तब ओके ओके ।।
जय घोष उठेगा जोरों से, बच्चा-बच्चा मुस्कायेगा ।
पी ओ के का जन-जन भी, बंधन से मुक्ति पाएगा ।
विश्व कहेगा नारी को, तुम भारत की ही वाणी हो ।
अदम्य साहस है तुम में,अजेय वीर क्षत्राणी हो ।।
अजेय वीर क्षत्राणी हो….
अजेय वीर क्षत्राणी हो ….
के. सी. राजपूत, कोटा ।
भारत की नारी…. देश की नारियों को समर्पित-कालीचरण राजपूत






