Saturday, April 18, 2026
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मौसमी बीमारियों के बचाव, रोकथाम और हीट वेव से निपटने के चिकित्सा विभाग सतर्क, जरूरी तैयारी रखने के निर्देश

के डी अब्बासी

कोटा 13 मार्च। जिले में मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं बचाव की तैयारियों को लेकर स्वास्थ्य भवन में संयुक्त निदेशक जोन कोटा डॉ एमपी सिंह ने बैठक लेकर जरूरी तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में सीएमएचओ डॉ नरेंद्र नागर, डिप्टी सीएमएचओ हैल्थ डॉ घनश्याम मीना, हरी नारायण मीणा, कीट विज्ञानी डीपी चौधरी, एपिडेमियोलोजिस्ट डॉ विनोद प्रभाकर सहित सभी बीसीएमओ, बीपीएम, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी सीएचसी व कोटा शहर के यूसीएचसी व यूपीएचसी के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी व पीएचएम आदि मौजूद थे। संयुक्त निदेशक ने डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टायफस आदि मौसमी बीमारियों से बचाव, रोकथाम को लेकर इस वर्ष अधिक सजगता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहाआ कि प्रशिक्षित सर्वे टीमें बनाकर प्रभावी एवं संवेदनशील क्षेत्रों में सघन एंटी लार्वा व जागरूकता गतिविधियां की जावे। उन्होने आगामी हीटवेव से बचाव, रोकथाम को लेकर भी विशेष प्रबन्ध रखने की बात कही, चिकित्सा संस्थानों में वाटर कूलर, कूलर, पंखे आदि को रिपेयर करवाने एवं नए की अवश्यकता होने पर क्रय करने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि जिन चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सा अधिकारी के पद रिक्त हैं वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होने कहा कि विगत वर्ष में मौसमी बीमारियों के केस ज्यादा आए थे, वहां विशेष सतर्कता बरती जाए। हाई रिस्क वाले स्थानों पर ज्यादा टीमें नियोजित की जाएं। साथ ही जागरूकता गतिविधियां भी की जाए। सीएमएचओ डॉ नरेंद्र नागर ने कहा कि चिकित्सा अधिकारी प्रभारी संबधित क्षेत्रों में चल रही सर्वे एवं एंटी लार्वा गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग करें एवं गुणवत्ता को भी जांचे। डेंगू पॉजिटिव केस वाले घर के आस-पास 100 घरों को सर्वे आवश्यक रूप से करावें। शहर के हॉस्टलों व खाली प्लॉट का भी सर्वे किया जावे व फोगिंग करवाई जाए। सीएमएचओ डॉ नागर ने कहा कि आगामी भीषण गर्मी एवं लू की आशंका को देखते हुए सभी चिकित्सा अधिकारी प्रभारी व बीसीएमओ अभी से समुचित तैयारियां शुरू करें। सभी चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सक, नर्सिंग स्टॉफ एवं पैरामेडिकल कार्मिक आवश्यक रूप से उपस्थित रहें। अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों एवं उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही छाया एवं ठंडे पेयजल की समुचित व्यवस्था हो। अस्पतालों में उपलब्ध वाटर कूलर, पंखें, कूलर, एसी आदि की आवश्यकतानुसार खरीद की जाए तथा जरूरत अनुसार मेंटीनेंस करवाया जाए। जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार नरेगा साइट्स पर श्रमिकों के लिए आवश्यक ओआरएस पैकेट की व्यवस्था संबधित क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र के द्वारा सुनिश्चत की जावे। डिप्टी सीएमएचओ हैल्थ डॉ घनश्याम मीना ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों पर आईईसी जागरूकता कॉर्नर बनाया जाए जहां संबधित बेनर पोस्टर का डिसप्ले हो व मच्छर के लार्वा का प्रदर्शन कर आमजन को समझाया व जागरूक किया जाए। उन्होने कहा कि रोकथाम को लेकर हाउस इंडेक्स व ब्रिटयू इण्डेक्स को आवश्यक रूप से मॉनिटर किया जाए। अस्पतालों में आवश्यक उपचार संबधी दवाइयां की उपलब्धता सुनिश्चत की जाए। रक्त पट्टिका का संचयन भी लक्ष्य अनूरूप किया जाए। गम्बूशिया मछलियों के लिए जिले में स्थापित हैचरीज की मरम्मत करवा ली जाए। अस्पताल के मलेरिया-डेंगू वार्ड मंे मच्छरदानियां भी लगाई जावे। उन्होने जल जनित बीमारियांे से बचाव के लिए वाटर सैंपलिंग पर भी जोर दिया। साथ ही स्क्रब टाइफस से बचाव, रोकथाम के लिए भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान क्लारोस्कोप मीटर से पानी में क्लोरीन का स्तर जांचने की विधी भी बताई गई।

बैठक में एपीडेमियोलोजिस्ट डॉ विनोद प्रभाकर को एनसीडीसी नई दिल्ली, भारत सरकार द्वारा आयोजित 14वीं आईएई नेशलन कॉन्फ्रेंस में कोटा में आउटब्रेक इन्वेस्टिगेशन पर दिए प्रस्तुतिकरण पर मिले अवार्ड को लेकर बैठक में बधाई दी एवं सम्मानित किया।

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