होली गीत – होरी के हुरहारे
✍️ रघुराज सिंह कर्मयोगी
होरी के हुरहारे, बड़े बंजमारे,रंग मोपै डारि गयौ।
उड़ गई फरिया भीग गईअंगिया,मगन मन नाच रहौ। 1
साजन मोरी पकरी बहियां, मारी देवर पिचकारी।
अंगअंग है फड़कन लागौ,निकसि गई सिसकारी।
नैन शरारत वारे,गजब रतनारे,रंग मोपै डार गए। 2
ननद गुलाल मलौ मेरे गालन,लाल लाल कर दीने।
हंसी छूटि गई सास ससुर की, ताऊ भए पसीने।
कुन्हाड़ी के छोरे,लगे भोरे भोरे,रंग मोपै डार गए। 3
गोकुल नंदगांव की छोरी,होरी खेलें कुंज गलिन में।
छोरे कर रहे हंसी ठिठोली,भावी मारे डंडे तन मेें।
भंग खाए लाला,छेड़े ब्रजवाला,रंग मोपै डार गए। ,4
लंगूरन जैसौ मुखड़ा है गयौ, नैंन दिखें जैसे तारे।
मंगोड़ी संग धनिये की चटनी, रसगुल्ला मतवारे।
लल्लू गूंजे खाजा,जल्दी आजा,रंग मोपै डार गए। 5
चंग बजें होली पर ढम ढम,थाप पड़त ढोलक पर।
70 साल के बुढ़ऊ नच रहे,बार करे तक तक कर।
जगन्नाथ हलवाई,बड़ौ हरजाई, रंग मोपै डार गयौ। 6
होली गीत – होरी के हुरहारे- रघुराज सिंह ‘कर्मयोगी’






