👌होली के रंग :कवियों के संग,,,,,,,,,, काव्य-संध्या👌
यो थ्वार छै प्रेम प्रीत को, ज्यात-पाँत को नांही। हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाई, गळे मिले सब भाई।। कतरा ई दन सूँ अणबोल्या, हिवड़े खुशियाँ छाई। दुखड़ा नै सबका सब भूल्या, भूल्या लोग लुगाई।। भगवान सरिखा होळी खैले, दिव्य जोत जळाई ।। होळी,,,,,,,..
✍️कवि बद्रीलाल ‘दिव्य’
कोटा/चम्बल साहित्य संगम की ओर से होली के रंग, कवियों के संग काव्य संध्या का आयोजन महर्षि दधिची सभागार कुन्हाडी में किया गया। जिसमें कवियों ने रंगों के उत्सव को समर्पित कविताओं में विभिन्न रंगों को उकेरा तथा सामाजिक सद्भावना का संदेश दिया।
होली को समर्पित बंटी सुमन के दोहों के बाद हास्य गीतकार सुरेश पण्डित ने हाडोती में फरड़ा सुनाकर माहौल को होली के रंगों से सराबोर कर दिया। रुपनारायण, संजय व मयूर सोनी के बाद प्रसिद्ध गीतकार मुरलीधर गौड़ ने होली को समर्पित मधुर स्वर में गीत सुनाकर खूब दाद बटोरी।
मंच संचालक एवं हास्य व्यंग्य कवि हलीम आईना ने अपने दोहों, क्षणिकाओं और आधुनिक परिभाषाओं से खूब हंसाया। अध्यक्षता कर रहे हिन्दी-राजस्थानी कवि-गीतकार बद्री लाल दिव्य ने होली और पवित्र रमजान की मंगलकामनाएं देते हुए होली गीत सुनाकर प्रशंसा पाई। अंत में हास्य गीतकार विश्वामित्र दाधीच ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए पिचकारी शीर्षक से श्रृंगार का सराहनीय गीत सुनाकर होली को समर्पित काव्य संध्या का शानदार समापन किया।
होली के रंग :कवियों के संग,,,,,,,,,, काव्य-संध्या सम्पन्न







