छावनी निवासी अब्दुल रहीम के सपने को पूरा करने के लिए उनकीबेटी नेशनल एथेलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उडिसा रवाना हो गई है,
समाज ने उनका साथ दिया तो मनोबल बढ गया और पिता के सपनों को साकार करने के लिऐ बेटी आयशा उडिसा रवाना हो गई। जिन बच्चों को पंचर की दुकान लगाकर बडा खिलाड़ी बनाने का सपना लिए अब्दुल रहीम ने दिनरात एक किए थे वह सपना तो वह पूरा कर गए लेकिन उस सपने की जीत का उत्साह वह नहीं देख सके। नियति को कुछ और ही मंजूर था और अब्दुल रहीम की टायर फटने से मौत हो गई थी, जिसके बाद समाज के
लोग आए और परिवार की आर्थिक मदद के साथ ही उनके साथ खड़े रहे जिस कारण क्च्चों का हौंसला बढ़ा और वह एक बार फिर
पिता के सपने को पूरा करने के लिए निकल पड़े। पिता की मौत ने परिवार को झकझोर दिया। खेलना तो दूर उसके लब पिता का नाम लेने मात्रा से कांप उठते हैं। बड़ी बेटी एथलेटिक्स में उड़ीसा में नेशनल खेलने रवाना हो गई।







