Saturday, April 18, 2026
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 स्वं गौरीशंकर कमलेश एवं माताजी स्वं कमला कमलेश की स्मृति में आयोजित समारोह में 31वें पुरस्कार और सम्मान समारोह सम्पन्न

✍ देवकी दर्पण

कॊटा”मातृभाषा राजस्थानी का साहित्य शक्ति, भक्ति एवं अनुरक्ति का त्रिवेणी संगम है। यह पावन ज्ञाननिधि हमें प्रतिपल गौरवान्वित करती है। इस भाषा की 73 जीवंत बोलियाँ एवं उन्हें व्यवहृत करने वाली करोड़ो की जनशक्ति इसकी समृद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि कर रही है। गाँव-ढाणी से लेकर महानगरों तक हो रहे साहित्यिक आयोजन इस भाषा के जनभाषा होने को प्रमाणित करती है।” उक्त विचार कोटा शहर में आयोजित राजस्थानी भाषा पुरस्कार समारोह में पुरस्कृत साहित्यकार डॉ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत’ ने व्यक्त किए।

स्वं गौरी शंकर कमलेश एवं माताजी स्वं कमला कमलेश की स्मृति में आयोजित समारोह में 31वें पुरस्कार और सम्मान समारोह सम्पन्न।

आज दिनांक 24 नवम्बर को इन्द्रा मार्केट कोटा स्थित ज्ञान भारती विद्यालय संस्थान द्वारा स्वं गौरी शंकर कमलेश एवं माताजी स्वं कमला कमलेश की स्मृति में आयोजित समारोह में 31वें पुरस्कार और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें समिति अध्यक्ष श्रीमती वीणा शर्मा, मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि “खास पावण” दीनदयाल शर्मा वरिष्ठ साहित्यकार, हनुमानगढ़ से पधारे ,अध्यक्षता विश्वामित्र दाधीच वरिष्ठ गीतकार एवं साहित्यकार, स्वागताध्यक्ष राजकुमार शर्मा, द्रोण शर्मा, मोहित शर्मा, मुंगा फावणा श्रीमान जयसिह आशावत वरिष्ठ साहित्यकार बून्दी नैनवॉं से पधारे एवं आयोजन समिति के सचिव सुरेन्द्र शर्मा, पुरस्कार सचिव जितेन्द्र निर्मोही ने शुभारंभ मै मंच स्थ अतिथि यों द्वारा माँ शारदा का पूजन अर्चन किया गया। माँ शारदा की सरस सरस्वती वंदना हाड़ौती के लोकप्रिय गीतकार दुर्गा शंकर बैरागी ” झोळी मांडू सारे, दीजै माँ बसी” करपा करने मात थू, मल जावै आफिस” द्वारा की गई।

स्वागत उद्धबोधन सुरेन्द्र शर्मा संस्था सचिव ने कहा कि ” आपके आशीर्वाद से पिछले 31 वर्ष से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। पिताजी व माताजी ने हाड़ौती के लिए जो काम किया हम आप सभी के सहयोग से निरन्तर चला रहे हैं। संस्थान के पुरस्कार सचिव जितेन्द्र निर्मोही ने अपने बीज वक्तव्य में कहा इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर का राजस्थानी सम्मान माना जाना गौरव का विषय है। राजस्थानी भाषा का यह पहला संगठन है जो पिछले ३१ वर्षों से राजस्थानी भाषा साहित्य के क्षेत्र में पुरस्कार देता है। यहां राजस्थानी भाषा के नामवर गीतकार, समकालीन कवि, समीक्षक, कथाकार, निबंधकार पुरस्कृत हो चुके हैं।यह संस्था साहित्य,कला और संस्कृति को जीवंत बनाए रखती है।

कार्यक्रम संयोजक नहुष व्यास ने बताया कि इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहें हाड़ौती अंचल के लोकप्रिय गीतकार विश्वामित्र दाधीच ने कहा कि “जो साहित्य शास्त्रीय म रच बसकर कठिन शब्दावली को आवरण ओढकर आगे चाले तो वह साहित्य जनजन तक पहुच सकै.जन जन तक वही साहित्य पहुचा है जो शब्द सरल हो लेकिन भाव गम्भीर हो, ऐसा मेरा मानना है, लोक परिपक्व होने के बाद ही सास्त्र होता है, लोक साहित्य की दौड़ बहुत लम्बी और बहुत गहरी होती है। “

मुख्य अतिथि पद को सुशोभित कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार हनुमान गढ़ से पधारे दीनदयाल शर्मा ने कहा कि “वरिष्ठ बाल साहित्यकार एवं समारोह के मुख्य अतिथि दीनदयाल शर्मा ने कहा कि साहित्य का सम्मान करेंगे तो संस्कृति और संस्कार भी बचेंगे। श्री शर्मा ने कहा कि आज 31वें साहित्यकार सम्मान समारोह में दो साहित्यकारों को सम्मानित करना बहुत मायने रखता है। इस मंच के माध्यम से मैं एक बात और कहना चाहूंगा कि हम बच्चों से बात करें । उनकी भावनाओं को समझें क्योंकि बच्चे हमें बहुत कुछ सिखाते हैं। बच्चे हमेशा सच्चे होते हैं । उनमें कोई द्वेष भावना होती है और ना ही जाती पांत और छुआछूत मानते हैं। बच्चे मन से इतने सरल होते हैं कि वे कभी किसी के प्रति कोई गांठ नहीं बांधते। जहां तक हो सके हम बच्चों से बात करें।

इस अवसर पर हिन्दी व राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही द्वारा रचित कुंजी रानी छंद काव्य संग्रह का लोकार्पण भी किया गया।

मुख्य वक्ता बूंदी नैनवॉं से पधारे जय सिंह जी आशावत साहब ने निर्मोही जी की विमोचित कृति कुँरजा रानी छंद रच पर प्रकाश डालते हुए कहा, जितेन्द्र निर्मोही जी नवोदित साहित्यकारों को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। स्वं गौरी शंकर कमलेश स्मृति में आयोजित समारोह में 31वें पुरस्कार ” राजस्थानी साहित्यः साख अर संवेदना” कृति के लिए रचनाकार डॉ गजादान सिंह” शक्तिसुत ” डीडवाना के वरिष्ठ साहित्यकार को ग्यारह हज़ार नकद राशि प्रदान कर दिया गया, इस अवसर पर गजादान सिंह चारण ने कहा कि “”मातृभाषा राजस्थानी का साहित्य शक्ति, भक्ति एवं अनुरक्ति का त्रिवेणी संगम है। यह पावन ज्ञाननिधि हमें प्रतिपल गौरवान्वित करती है। इस भाषा की 73 जीवंत बोलियाँ एवं उन्हें व्यवहृत करने वाली करोड़ो की जनशक्ति इसकी समृद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि कर रही है। गाँव-ढाणी से लेकर महानगरों तक हो रहे साहित्यिक आयोजन इस भाषा के जनभाषा होने को प्रमाणित करती है।” उक्त विचार कोटा शहर में आयोजित राजस्थानी भाषा पुरस्कार समारोह में पुरस्कृत साहित्यकार डॉ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत’ ने व्यक्त किए। डॉ. चारण ने अपनी मातृभाषा राजस्थानी की संवैधानिक मान्यता के लिए बहुमुखी एवं समेकित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा हम सब राजस्थानी भाषा-भाषियों के लिए वह दिन सबसे बड़ा दिन होगा, जब हमारी मातृभाषा को केंद्र एवं राज्य सरकारों की ओर से मान्यता प्रदान की जाएगी। उन्होंने गौरीशंकर कमलेश राजस्थानी राष्ट्रीय भाषा पुरस्कार हेतु निर्णायक एवं नियामक मण्डल का आभार ज्ञापित किया।”

माताजी स्वं कमला कमलेश की स्मृति में आयोजित समारोह में तीसरा पुरस्कार” प्रेम प्यार अर प्रीत” काव्य संग्रह पर मानसी शर्मा को पांच हजार रुपये नकद राशि प्रदान किया गया। युवा कवयित्री और बाल साहित्यकार मानसी शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मेरी राजस्थानी काव्य कृति प्रेम, प्यार और प्रीत के लिए सम्मानित किया। मैं खुद को बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। सम्मान समारोह के आयोजक और निर्णायकों का आभार प्रकट करती हूं कि आपने मेरी कृति का चयन करके मुझे सम्मानित किया।इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही द्वारा रचित काव्य संग्रह “कुरजां राणी छंद रचै” का लोकार्पण भी किया गया।

विशेष सेवाओं के लिए विशिष्ट सम्मान –

तपेश्वर भाटी यह प्रर्यावरणविद् है.इनकॊ यह सम्मान पर्यावरण के श्रेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये दिया गया। इस अवसर पर आपने कहा कि”, वर्तमान में पर्यावरण सुरक्षा खतरे में सरकारे भी इस में उदासीन है।पर्यावरण सुरक्षा मेंहम सब भागीदारी निभाये।”

स्नेहलता शर्मा  वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेविका है, आप सफल मंच संचालक है। इनकॊ यह सम्मान साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये दिया गया।

गोपाल सिंह सॉलकी आपने यूट्यूब पर रील के माध्यम से हाड़ौती का प्रसार प्रसार किया है, इसलिये आपको सम्मानित किया गया। हाडौती यूट्यर गोपाल जी सोलंकी ने कहा कि हमारे सारे विडियों हाडौती में ही है और इस बोली ने हमें पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। “हमेशा हाडौती में ही रहेगे।”

धनराज टॉक को राजस्थानी भाषा में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर कोटा महानगर के वरिष्ठ साहित्यकार देवकी दर्पण, मुकुट मणिराज, किशन वर्मा, रामस्वरूप मूदड़ा, महेश पंचोली, हलीम आयना, हेम सिंह हेम, बद्री लाल दिव्य, जगदीश भरती, चौथा प्रजापति, जोधराजपरिहार, दिलीप सिंह हर प्रित,राजेन्द्र पंवार, मुरलीधर गौड़, नन्दू राजस्थानी, योगेश यथार्थ, बाबू बंजारा, मोहित, किशन प्रणय, आर सी आदित्य, रामेश्वर शर्मा रामू भैया, भगवती प्रसाद गौतम, योगी राज योगी, साहित्यकार  उपस्थित थे।

मातृशक्ति में वरिष्ठ साहित्यकारां श्यामा शर्मा, सोनिया,

रेखा पंचोली, डॉ युगल, मंजु रश्मि, सुमन शर्मा आयोजन की शोभा बढ़ा रहे थे।

स्वागताध्यक्ष श्री राजकुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन युवा व्यंग्यकार नहुष व्यास ने किया।

 

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