डाबी/कोटा/केशवराव पाटन।चम्बल की पैदल परिक्रमा कर रहे पर्यावरणविद् रोबिन सिंह, स्वामी तेजोमायावन एवं रामधीर सिंह रत्न हे जो हमें उपहार में मिले हैं।इनको बचाने की जिम्मेदारी हर व्यक्ति की है।
मंगलवार शाम कोटा पहुंच गए। डाबी ब्राइट केरियर स्कूल में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए रोबिन सिंह ने कहा कि हवा पानी और अन्न वेदों के उपहार है। उन्होंने कहा कि चम्बल के किनारे सभ्यताओं का विकास हुआ तो जवाबदेही भी सामुहिक है। चम्बल संसद के समन्वयक बृजेश विजयवर्गीय ने नदी की महत्ता बताई। संरक्षक यज्ञदत्त हाडा, विट्ठल कुमार सनाढ्य ने कहा कि नदी के संरक्षण के लिए पदयात्रा हो रही है। स्कूल निदेशक रजनी हाडा, कुलदीप हाडा अर्चना राजावत ने पद यात्रियों का स्वागत किया। पदयात्रा में शामिल लोगों ने पुनर्जीवित एरू नदी के भी दर्शन किए।
-कोटा में स्वागत
पदयात्री शाम को नांता में सगस आश्रम में पहुंचे जहां पर चम्बल संसद के संरक्षक यज्ञदत्त हाडा समन्वयक बृजेश विजयवर्गीय, युधिष्ठिर चानसी, समाज सेवी अरूण भार्गव, कन्हैयालाल लाल केवट, पप्पू केवट आदि ने रोबिन सिंह का स्वागत किया। हाडा ने बताया कि चम्बल बचाओ कारवां बुधवार 8.30 बजे बूंदी रोड़ पर सैंट जोन्स विद्यालय में विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। उसके बाद परिक्रमा केशवराव पाटन के लिए रवाना होगी। जहां केशव घाट पर शाम को 5 बजे महाआरती से पूर्व चम्बल संवाद होगा जिसमें कोटा व बूंदी जिले के लोग भाग लेंगे।





