Wednesday, April 22, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

1 नवम्बर को स्वाति नक्षत्र व आयुष्मान योग बनने से उस समय दीपावली मनाने से प्रजा व राजा की हानि होती है, दीपावली पर्व 31अक्टूबर को

कोटा। वेदांग ज्योतिष अनुसंधान संस्थान कोटा एवं कोटा ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आज काली माता मंदिर पर दीपावली पर्व के निर्णय पर विद्वत जनों की संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी में सर्वसम्मति से दीपावली पर्व 31 अक्टूबर को मनाने का निर्णय किया गया।

विद्वानों ने बताया कि दीपावली पर्व रात्रि का है अतः शास्त्रानुसार जिस दिन प्रदोष व्यापिनी अमावस्या अधिकतम हो उस दिन दीपावली मनानी चाहिए । पित् कार्य भी 31 अक्टूबर को दिन में किया जा सकता है। देश में कुछ पंडित नक्षत्र, योग व उद्यात तिथि की बात करते हैं, जबकि इस पर्व का इनसे कोई सम्बन्ध नहीं है। श्री घनश्यामाचार्य गौतम जी ने बताया कि ‘मुहूर्त गणपति’ में लिखा है कि आगामी दिन 1 नवम्बर को स्वाति नक्षत्र व आयुष्मान योग बनने से उस समय दीपावली मनाने से प्रजा व राजा की हानि होती है। इसी प्रकार श्री पुरुषोत्तम पंचोली ने बताया कि देवज्ञ काशीनाथ भट्टाचार्य के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘शीघ्रबोध’ में लिखा है कि “दीपावली के समय यदि प्रतिपदा दिख जाए तो उस दूषित तिथि को रजस्वला की भांति त्याग कर देना चाहिए। आषाढ़ी पूर्णिमा, रक्षाबंधन, होली और दीपावली को कभी भी नन्दा यानि प्रतिपदा से विद्ध नहीं करना चाहिए वरना धन धान्य का क्षय होता है। ”

इस अवसर पर पं० श्री गणपति मिश्र, श्री नागेन्द्र प्रतिहस्त, श्री पुरुषोत्तम पंचोली, श्री अरुण मित्तल, श्री जयराज गुप्ता, श्रीमती प्रमिला गुप्ता तथा अन्य विद्वानों ने संगोष्ठी पर अपने विचार रखे ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles