“भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी”
महर्षि गौतम उद्यान आरके पुरम में हो रही श्री राघवेंद्र कला संस्थान द्वारा मंचित रामलीला में आज पृथ्वी पुकार,राम जन्म, सीता जन्म एवं विद्या अध्ययन की लीला का मंचन किया गया।
रावण और कुंभकरण के अत्याचारों से दुखी होकर पृथ्वी गौ रूप धारण कर देवताओं के पास जाती है सभी मिलकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। भगवान विष्णु आकाशवाणी के माध्यम से सभी को विश्वास दिलाते हैं कि वह अपने अंश सहित पृथ्वी पर अवतार लेंगे। तब ब्रह्मा जी जामवंत के रूप में तथा शिवजी हनुमान के रूप में अवतार लेने की बात कहते हैं।
अयोध्या में महाराज दशरथ के कोई भी पुत्र न होने के कारण वह दुखी थे इस कारण महर्षि वशिष्ठ के बताए अनुसार वह पुत्रेष्टि यज्ञ करवाते हैं जिससे अग्नि देव प्रकट होकर हवी प्रदान करते हैं जिसे तीनों रानियां ग्रहण करती है।
नवमी तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में भगवान श्री राम का प्रागट्य होता है अयोध्या में चारों ओर हर्ष की लहर दौड़ पड़ती है बधाइयां देने अनेकों भांट, किन्नर आते हैं। तब भगवान शिव भी दर्शन करने अयोध्या में आते हैं वहां श्री रामचंद्र की बाल लीलाओं का मनभावन मंचन किया गया । चारों भाइयों का नामकरण महर्षि वशिष्ठ अपनी बुद्धि के अनुसार करते हैं, चारों भाई गुरुकुल में विद्या अध्ययन करने जाते हैं और बहुत ही कम समय में शास्त्रों तथा शास्त्र का ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं।
उधर जनकपुरी में भीषण अकाल पड़ता है जिसके कारण महाराज जनक पूजा अनुष्ठान करवाते हैं तथा स्वयं धरती पर हल लेकर निकल पड़ते हैं। हल की सीत एक स्थान पर रुक जाती है जब वहां पर खोद कर देखा जाता है तो एक बालिका प्रकट होती है उसका नाम सीता रखा जाता है। अयोध्या की ही भांति जनकपुरी में भी सीता जन्म पर हर्षोल्लास का वातावरण हो जाता है।





