अखिल नामा
बारां/विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर सेवा निवृत्त वन विभाग अधिकारी एवं कर्मचारी सोसाइटी, कोटा द्वारा शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के समर्थन में एक व्यापक जागरूकता एवं समर्थन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व उप वन संरक्षक जोेधराज हाडा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित सौ से अधिक पर्यावरण-संवेदनशील नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य शाहबाद क्षेत्र के वनों, जैव-विविधता, वन्यजीव आवास तथा स्थानीय समुदायों के जीवन से जुड़े प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना रहा। वक्ताओं ने शाहबाद जंगलों को दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की एक महत्वपूर्ण हरित धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन की क्रियान्वयन समिति शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां के संरक्षक प्रशांत पाटनी ने कहा कि “शाहबाद जंगल हमारे जीवन से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसकी वजह से हम सभी लोग खुली हवा में सांस लेते हैं।इस जंगल को राजस्थान का कश्मीर माना जाता है जिसकी संरक्षा और सुरक्षा सरकार और हम सभी की जिम्मेदारी है।” अन्य संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में कहा कि शाहबाद घाटी केवल जंगलों का क्षेत्र नहीं, बल्कि अनेक दुर्लभ वनस्पतियों, वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र का संवेदनशील क्षेत्र है। किसी भी प्रकार की अविवेकपूर्ण परियोजना से इस क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हो सकती है, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।”
भारतीय सांस्कृतिक निधि इंटेक बारां चैप्टर के कन्वीनर जितेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि” शाहबाद के जंगल प्राकृतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व बन चुका है और इसके लिए जन-आंदोलनों की भूमिका निर्णायक होती है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व उप वन संरक्षक जयराम पाण्डेय ने कहा कि” वन विभाग में वर्षों तक सेवा देने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी जंगलों के महत्व को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पर्यावरण संरक्षण के लिए इस प्रकार की सक्रिय भूमिका प्रेरणादायी है और यह आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।”
मुख्य अतिथि जोेधराज हाडा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “पृथ्वी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि विकास और संरक्षण में संतुलन अत्यंत आवश्यक है। जंगलों के बिना न तो पर्यावरण सुरक्षित रह सकता है और न ही मानव जीवन। उन्होंने शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन को जनहित का आंदोलन बताते हुए इसके समर्थन में एकजुट रहने का आह्वान किया।”
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों ने शाहबाद जंगल बचाने की शपथ ली तथा जंगलों की रक्षा के संकल्प के साथ जोरदार नारेबाजी की। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक चेतना और प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।
कार्यक्रम के समापन पर सोसाइटी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।






