जिस वक़्त भारत जय श्री राम के जयकारों से गुंजायमान था। अदिनाथ,राम, कृष्ण और महावीर की इस पावन धरा का कण-कण मानों आदिनाथ के वंशज क्षायिक सम्यकदृष्टि प्रभु श्री राम के नाम की गूंज से जीवंत हो उठा था। मोदी के रामराज्य में लगा शायद अब अच्छे दिन आने वाले हैँ।
लेकिन इस गूंज के बीच भारत के गुजरात प्रांत मे स्थित जैन धर्म के 22 वे तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की निर्वाण स्थली गिरनार में धर्म और अध्यात्म तो दूर मानवता का भी गला घोटा जा रहा था। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का नाम लेने वाले मानवीय मार्यादाओं को तार-तार कर दानवीय कृत्य कर रहे थे।
हैरानी की बात है, जिस देश मे राम के जयकारे लगाए जा रहे थे वहां नारायण श्री कृष्ण के चचेरे भाई जैन धर्म के 22वे तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के जयकारे लगाने वालों को पीटा जा रहा था। उनसे अभद्रता की जा रही थी।





