अजीत वछानी जी भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन ज़िंदा रहते हुए वो कुछ ऐसी फिल्मों में काम कर गए जो बरसों तक सिनेमा के शौकीनों को उनकी याद दिलाती रहेंगी। 90s के उन कुछ चरित्र अदाकारों में से एक थे अजीत वछानी जिन्होंने निगेटिव और पॉज़िटिव, दोनों तरह के किरदारों को बखूबी निभाया था। अजीत जी को सम्मानपूर्वक याद करते हुए उनकी कहानी जानते हैं। अजीत वछानी का जन्म हुआ था 10 अगस्त 1951 को एक गुजराती परिवार में। चूंकि स्कूल के दिनों से ही अजीत वछानी ने नाटकों में काम करना शुरू कर दिया था तो कहा जा सकता है कि छोटी उम्र से ही अजीत वछानी एक्टिंग की तरफ आकर्षित होने लगे थे। परिवार वालों ने जब एक्टिंग के प्रति उनके लगाव को महसूस किया तो उन्होंने भी अजीत वछानी को एक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। अजीत वछानी जब कॉलेज में आए तो उन्होंने खुद को पूरी तरह से ड्रामा को समर्पति कर दिया। कॉलेज में रहते हुए अजीत वछानी ने कई गुजराती ड्रामों में काम किया था। और उनका खूब नाम हुआ।
गुजराती थिएटर की दुनिया में अजीत वछानी जब मशहूर हो गए तो उन्हें गुजराती फिल्मों में काम करने का मौका भी मिला। भाषा पर अजीत वछानी जी की बहुत अच्छी पकड़ थी। वो कई भाषाएं जानते थे जैसे गुजराती, सिंधी, मराठी, हिंदी और अंग्रेजी। जिस पहली गुजराती फिल्म में अजीत वछानी जी ने काम किया था उसका नाम था ‘जोग संजोग'(1980)। उस फिल्म में गुजराती फिल्मों के स्टार नरेश कनोडिया हीरो थे। जबकी अजीत वछानी जी का किरदार भी बहुत अच्छा था। वो उस फिल्म में डॉक्टर बने थे। जोग संजोग में अजीत वछानी जी के काम से प्रभावित होकर डायरेक्टर सोहनलाल कंवर ने उन्हें अपनी फिल्म ‘पापी पेट का सवाल है’ में काम करने का मौका दिया। ये पहली हिंदी फिल्म थी जिसमें अजीत वछानी जी की ने काम किया था। ये फिल्म 1984 में रिलीज़ हुई थी। और इसमें मुख्य भूमिकाओं में राजेश खन्ना व शत्रुघ्न सिन्हा ने काम किया था। इसके बाद अजीत वछानी जी का हिंदी फिल्मों का सफर भी शुरू हो गया। उन्हें फिल्मों के ढेरों ऑफर्स मिलने लगे। लेकिन उन्होंने चुनी महज़ कुछ ही।
1985 में अजीत वछानी जी दो हिंदी फिल्मों में दिखे थे। ये फिल्में थी ‘झूठी’ और ‘खामोशी’। लेकिन इन फिल्मों से अजीत वछानी जी के करियर को कुछ खास फायदा नहीं हुआ। उन्होंने हिंदी फिल्मों से थोड़ा ब्रेक लिया। लेकिन ब्रेक के बाद जब वो वापस लौटे तो एक ऐसी फिल्म के ज़रिए लौटे जिसने धमाल मचा दिया था। उस फिल्म का नाम था मिस्टर इंडिया। मिस्टर इंडिया में अजीत वछानी तेजा नाम के एक माफिया के रोल में दिखे थे। इस रोल में अजीत वछानी जी को खून नोटिस किया गया। मिस्टर इंडिया के बाद अचीत वछानी जी और भी कई हिंदी फिल्मों में दिखे जैसे क़यामत से क़यामत तक, कमांडो, मैं आज़ाद हूं, त्रिदेव, ऐलान-ए-जंग, मैंने प्यार किया, कॉलेज गर्ल, 100 डेज़, आग लगा दो सावन को, खूनी पंजा, जान तेरे नाम, जो जीता वो ही सिकंदर, दीदार, राजू बन गया जेंटलमैन, कभी हां कभी ना, लुटेरे, दिली की बाज़ी, छोटी बहू, दिलवाले, बेटा हो तो ऐसा इत्यादि। राजश्री प्रोडक्शन्स की फिल्मों का तो अजीत वछानी अहम चेहरा बन गए थे।
‘मैंने प्यार किया’ में ये भले ही निगेटिव भूमिका में दिखे हों। लेकिन ‘हम आपके हैं कौन’ व ‘हम साथ साथ हैं’ में इन्होंने बड़े अच्छे किरदार निभाए थे। फिल्मों के साथ-साथ अजीत वछानी हिंदी टीवी शोज़ में भी काम कर रहे थे। 80s के दशक के आखिर में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए चुनौती, मुजरिम हाज़िर हो, मिट्टी के रंग जैसे टीवी धारावाहिकों में ये दिखे थे। श्याम बेनेगल की भारत एक खोज सीरीज़ के एक एपिसोड में भी इन्होंने काम किया था। फिर 90s में भी इन्होंने कई टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया था। और टीवी पर भी ये जाना-पहचाना चेहरा बन गए थे। 2002 में सोनी टीवी पर प्रसारित हुआ ‘एक महल हो सपनों का’ शो में अजीत वछानी जी का काम बहुत सराहा गया था। ये उनके आखिरी टीवी शोज़ में से एक था। इसके बाद अजीत वछानी जी ने ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ व घर संसार नाम के दो और टीवी शोज़ में काम किया था। करियर के आखिरी दौर में अजीत वछानी जी ने सिर्फ तुम, हर दिल जो प्यार करेगा, क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता, जोड़ी नंबर वन जैसी फिल्मों में काम किया था।
साल 2002 में आई अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, परेश रावल और अर्जुन रामपाल स्टारर आंखें अजीत वछानी जी की आखिरी फिल्म थी। इसके बाद वो किसी और फिल्म में काम नहीं कर सके। क्योंकि इसके बाद उनकी तबियत बहुत ज़्यादा खराब हो गई थी। बहुत दिनों तक उन्हें अस्पताल में रहना पड़ा था। लेकिन, जाने क्यों? अजीत वछानी जी ने अपनी बीमारी की खबर किसी को नहीं दी। और बड़ी ही खामोशी से महज़ 52 साल की उम्र में, यानि 25 अगस्त 2003 को अजीत वछानी ये दुनिया छोड़ गए। जाने से पहले अजीत जी एक बड़ी तगड़ी फिलोसॉफी वाली बात कहकर गए थे। उन्होंने कहा था कि ‘अपने दुख-तकलीफ और बीमारी के बारे में कभी किसी दूसरे को कुछ नहीं बताना चाहिए। क्योंकि हर घर में मरहम तो नहीं मिलता। लेकिन नमक ज़रूर मिल जाता है।’ कहते हैं कि जब अजीत वछानी के परिवार से ये जानने की कोशिश की गई कि उन्हें क्या बीमारी हुई थी तो परिवार ने कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया। परिवार का कहना था कि अजीत नहीं चाहते थे कि उनकी बीमारी किसी को पता चले।
अजीत वछानी जी की निजी ज़िंदगी की बात करें तो 80 के दशक की शुरुआत में ही उन्होंने एक्ट्रेस चारूशीला साबले से लव मैरिज कर ली थी। चारूशीला बहुत अच्छी एक्ट्रेस हैं और बहुत अच्छी क्लासिकल डांसर भी हैं। अजीत वछानी जी की दो बेटियां हैं जिनके नाम हैं योहाना व त्रिशाला।
साभार-किस्सा टीवी





