Tuesday, October 13, 2026
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दुबई के प्रसिद्ध मुशायरा आयोजक रेहान सिद्दीकी के सम्मान में आत्मीय साहित्यिक समारोह आयोजित

कोटा में साहित्य, संस्कृति और आत्मीयता का अनूठा संगम

दुबई के प्रसिद्ध मुशायरा आयोजक रेहान सिद्दीकी के सम्मान में आत्मीय साहित्यिक समारोह आयोजित

कोटा । राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा में दुबई के प्रसिद्ध मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आयोजक तथा डिजिटल क्रिएटर रेहान सिद्दीकी के सम्मान में एक आत्मीय साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया। समारोह में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी-उर्दू साहित्य के संरक्षण, साहित्यकारों को व्यापक पहचान दिलाने तथा डिजिटल माध्यमों से साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में रेहान सिद्दीकी के योगदान के लिए उन्हें “इंटरनेशनल हिन्दी -उर्दू लिटरेरी ब्रिज एवार्ड -2026” से सम्मानित किया गया | इसी अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि चिन्तक धर्मराज भारत को भी उनके साहित्यक अवदान के लिए सम्मानित किया गया |

कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ दीपक कुमार श्रीवास्तव , नोडल अधिकारी (सार्वजनिक पुस्तकालय कोटा संभाग, राजस्थान) एवं मण्डल पुस्तकालय अध्यक्ष राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा ने प्रस्तुत किया एवं आमंत्रित विशिष्ठ अतिथियों डॉ अतुल चतुर्वेदी वरिष्ठ व्यंगकार,महेंद्र नेह वरिष्ठ साहित्यकार,जितेन्द्र निर्मोही ख्यातनाम साहित्यकार, मुकुट मणिराज वरिष्ठ राजस्थानी गीतकार, विजय जोशी वरिष्ठ समीक्षक एवं आलोचक, तरूमीत सिंह बेदी वरिष्ठ लेखक तसव्वुर ,प्रेम शास्त्री वरिष्ठ गीतकार, निशामुनी गौड़ वरिष्ठ गीतकार , स्मिता जैन अध्यक्ष भूमिका वेलफेयर सोसायटी कोटा एवं प्रोफ़ेसर डॉ मनीषा शर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी विभाग जानकी देबी बजाज राजकीय कला कन्या महाविधालय कोटा डॉ जगदीश निराला वरिष्ठ गीतकार राजस्थानी ने प्रस्तुतियां पेश की |

डिजिटल माध्यमों से साहित्य को नई पहचान

समारोह के केंद्र में रहे रेहान सिद्दीकी ने अपने संबोधन में कहा कि बड़े-बड़े मुशायरों और कवि सम्मेलनों में श्रेष्ठ कवि एवं शायर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करते हैं, लेकिन आयोजन समाप्त होने के बाद अनेक प्रतिभाओं की रचनाएँ व्यापक जनसमुदाय तक नहीं पहुँच पातीं। इसी आवश्यकता को समझते हुए उन्होंने और उनकी पार्टनर ने डिजिटल माध्यमों पर साहित्यिक प्रस्तुतियों को रोचक, प्रभावी और लोकप्रिय स्वरूप में प्रस्तुत करने का प्रयास शुरू किया, ताकि साहित्यकारों की रचनाओं को अधिक दर्शक मिलें और उनकी रचनात्मक पहचान सुदृढ़ हो।

उन्होंने डिजिटल कंटेंट की प्रभावशीलता पर चर्चा करते हुए कहा कि किसी वीडियो के शुरुआती तीन सेकंड दर्शक का ध्यान आकर्षित करने में निर्णायक हो सकते हैं। इसलिए साहित्यिक प्रस्तुतियों को इस तरह तैयार करना आवश्यक है कि दर्शक ठहरकर उन्हें सुनें और रचना से जुड़ें। उन्होंने अपनी सादगीपूर्ण शैली में कई शेर सुनाए तथा उपस्थित साहित्यकारों के साथ आत्मीय संवाद और फोटो सत्र में भाग लिया। कोटा में मिले स्नेह से अभिभूत रेहान सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें ऐसा अनुभव हुआ मानो वे दुबई में ही अपने आत्मीय साहित्यिक परिवार के बीच हों।

समारोह का संचालन नीता डांगी ने अपनी प्रभावशाली आवाज़ और सुरुचिपूर्ण शैली में किया। इस अवसर पर हेमराज सिंह, बद्रीलाल दिव्य सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

समापन पर वक्ताओं ने कहा कि ऐसे छोटे, सहज और आत्मीय आयोजन साहित्यिक समाज में संवाद, सम्मान और रचनात्मक सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा की यह पहल साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करने और हिंदी-उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा को डिजिटल युग से जोड़ने की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रयास है। आयोजन में उपस्थित साहित्यकारों ने डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव एवं धर्मराज भारत के साहित्यिक योगदान तथा रेहान सिद्दीकी और शियाज़ा सिद्दीकी के साहित्य-सेवा संबंधी प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम का आयोजन संभागीय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव की पहल पर किया गया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्रीवास्तव ने संभागीय पुस्तकालय को केवल पुस्तकों के अध्ययन का केंद्र न रखकर शहर के साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संवाद का महत्त्वपूर्ण मंच बनाया है। उनके आत्मीय व्यवहार और साहित्य के प्रति समर्पण से पुस्तकालय में निरंतर रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित हो रही हैं।

समारोह में वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों, लेखकों एवं साहित्यप्रेमियों की सहभागिता रही। वक्ताओं ने कोटा की उस विशिष्ट साहित्यिक परंपरा को रेखांकित किया, जिसमें विभिन्न विचारधाराओं के साहित्यकार परस्पर सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना के साथ एक-दूसरे के आयोजनों में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यिक आयोजनों की सार्थकता उनकी भव्यता से अधिक उनकी गुणवत्ता, आत्मीयता और विचारों की समृद्धि में निहित होती है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार मुकुट मणिराज ने अपने विशिष्ट अंदाज में श्रृंगार रस की रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। विजय जोशी ने स्वागत उद्बोधन दिया। कवि निशामुनि गौड़ की रचना में पिता दुर्गादान सिंह की स्मृतियों का सजीव चित्रण देखने को मिला, वहीं प्रेम शास्त्री ने हिचकी से जुड़े लोकविश्वासों और शगुनों को रोचक काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी। साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही ने कैफ़ भोपाली तथा शायरों के अलमस्त स्वभाव से जुड़े संस्मरण साझा किए। वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र नेह सहित अन्य वक्ताओं ने साहित्य और समाज के पारस्परिक संबंधों पर विचार व्यक्त किए।

डॉ. मनीषा शर्मा की साहित्यिक अभिरुचि, अध्ययनशीलता और आलोचनात्मक दृष्टि की सराहना की गई। वहीं, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मराज भारत ने कोटा के इतिहास और साहित्य का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करते हुए अपने विचार रखे। उनके साहित्यप्रेम, विनम्रता और अध्ययनशील व्यक्तित्व को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उल्लेखनीय है कि उनका स्थानांतरण कोटा से भवानीमंडी हो चुका है। शायर तरुमीत बेदी ने अपनी साहित्यिक अभिरुचि और जीवंत उपस्थिति से समारोह की गरिमा बढ़ाई तथा अपना काव्य-संग्रह तसव्वुर भेंट किया।

इनकी रही गरिमामयी सहभागिता: वरिष्ठ साहित्यकार हेमराज “हेम”, रामकरण प्रभाती वरिष्ठ गीतकार संरक्षक सारंग साहित्य समिति कोटा,एडवोकेट दिनेश सिंह चोहान अध्यक्ष सारंग साहित्य समिति कोटा, एडवोकेट श्री सुरेश वैष्णव संयोजक सारंग साहित्य समिति कोटा, श्री बद्री लाल दिव्य अध्यक्ष चम्बल साहित्य समिति, हलीम आइना शायर एवं संयोजक चम्बल साहित्य समिति, सुरेश पंडित वरिष्ठ कवि कोटा, इंद्रकुमार जैन कोषाध्यक्ष भूमिका वेलफेयर सोसायटी कोटा, बिगुल कुमार जैन सेवानिवृत उपमुख्य अभियंता तापीय परियोजना कोटा, लेखराज शर्मा वरिष्ठ पत्रकार महानगर टाइम्स, श्री मनोज कुमार जैन सेवानिवृत विकास अधिकारी जीवन बीमा निगम कोटा,डॉ शशि जैन , सीमा वर्मा ,रोहित नामा,रोहित कुमार शर्मा, राधे विहारी मालव , दिव्यांश जांगीड, हरिओम नागर ,ईश्वर मीना सहायक एवं कार्यक्रम संचालिका नीता डांगी सहित अनेक साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने समारोह में सहभागिता की।

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