Monday, October 12, 2026
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चित्तौड़गढ़ के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अनिल सक्सेना की पुस्तक ‘मेरी आंखों में मेरा समय’ का हुआ विमोचन, डेढ़ दर्जन कवियों ने किया काव्य पाठ

 बारां जिला स्तरीय साहित्य एवं सांस्कृतिक संवाद 2026 का सफल आयोजन, साहित्य और लोक संस्कृति के नवजागरण पर हुई सारगर्भित चर्चा

चित्तौड़गढ़ के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अनिल सक्सेना की पुस्तक ‘मेरी आंखों में मेरा समय’ का हुआ विमोचन, डेढ़ दर्जन कवियों ने किया काव्य पाठ

बारां। जिले के तलावाड़ा स्थित सोनीजी ढाणी बारां जिला स्तरीय साहित्य एवं सांस्कृतिक संवाद 2026 का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों तथा स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना तथा साहित्य, लोक संस्कृति और कला के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

कार्यक्रम के दौरान चित्तौड़गढ़ से पधारे वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अनिल सक्सेना की पुस्तक ‘मेरी आंखों में मेरा समय’ का विमोचन मंचासीन वरिष्ठ साहित्यकार विजय जोशी, किशन रतनानी, डॉ. सुधीरा शर्मा, जगदीश जलजला, कृष्ण मुरारी मीणा एवं घनश्याम दाधीच के करकमलों से संपन्न हुआ। पुस्तक विमोचन के अवसर पर साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के महत्व को रेखांकित किया गया।

आयोजन में बारां जिले के चयनित साहित्यकारों और कलाकारों के साथ विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम में साहित्यिक प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं को सामने लाने का प्रयास किया गया।

इस अवसर पर मांगरोल के कवि एवं लोक कलाकार डॉ. जगदीश निराला ने अपने अभिनय और साहित्यिक कविताओं से विशेष छाप छोड़ी। उनकी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में करीब डेढ़ दर्जन कवियों ने काव्य पाठ कर अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्यिक वातावरण को जीवंत बनाया।

संवाद का केंद्रीय विषय ‘बारां साहित्य एवं सांस्कृतिक संवाद 2026’ रहा, जिस पर उपस्थित साहित्यकारों और प्रतिभागियों ने सारगर्भित चर्चा की। विचार-विमर्श के दौरान युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, लोक परंपराओं के संरक्षण तथा साहित्य के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना के विस्तार पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से ‘अपनी जड़ों से जुड़ता युवा’ और ‘साहित्य एवं लोक संस्कृति का नवजागरण’ जैसे विचारों को सार्थक दिशा देने का प्रयास किया गया। आयोजन ने साहित्यिक संवाद, रचनात्मक अभिव्यक्ति और लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

 

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