दशहरे की तैयारियों में जुटे कारीगर, बांस से लेकर रंगाई-सजावट तक दिन-रात कर रहे मेहनत
कोटा।दशहरे का पर्व नजदीक आते ही कोटा में रावण दहन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के बाजारों में रावण के पुतले सजने लगे हैं और इनकी बिक्री भी शुरू हो गई है। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरे को खास बनाने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उनके हाथों से तैयार हो रहे रंग-बिरंगे रावण के पुतले लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
बांस, बल्ली और अखबार से तैयार होता है रावण
रावण का पुतला तैयार करना आसान काम नहीं है। कारीगर सबसे पहले बांस और बल्ली की कटाई कर उसका ढांचा तैयार करते हैं। इसके बाद सुतली से ढांचे की बुनाई की जाती है। फिर चुन्नी, रद्दी अखबार और मैदा-अरारोट से बनी लेई की मदद से पुतले को आकार दिया जाता है। अंत में लाल, पीले, गुलाबी और काले रंगों से रंगाई-सजावट कर उसे आकर्षक रूप दिया जाता है। पुतले के हर हिस्से को तैयार करने में मेहनत, हुनर और समय लगता है।
पांच हजार रुपये तक की लागत, कीमत 20 हजार तक
रावण के पुतले बनाने वाले कारीगर भारत कुमार और फिरोज बताते हैं कि वे लंबे समय से इस काम से जुड़े हैं। पिछले पांच साल से वे कोटा आकर पुतले बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, पुतले की लागत उसके आकार और डिजाइन पर निर्भर करती है। एक बड़े पुतले को तैयार करने में करीब 2 हजार से 5 हजार रुपये तक खर्च आता है, जबकि उसकी बिक्री कीमत 20 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। पुतले की कीमत ग्राहक की मांग, आकार और सजावट के आधार पर तय होती है।
हर बजट के लिए उपलब्ध पुतले, वाटर-प्रूफ की भी मांग
बाजार में छोटे से लेकर बड़े आकार तक के पुतले उपलब्ध हैं। लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार पुतले खरीद रहे हैं और अग्रिम बुकिंग भी करवा रहे हैं। ग्राहकों की पसंद को देखते हुए कारीगर सस्ते और टिकाऊ पुतले तैयार करने के साथ प्लास्टिक कोटिंग वाले वाटर-प्रूफ पुतले भी बना रहे हैं। इसका उद्देश्य बारिश और नमी से पुतलों को होने वाले नुकसान को कम करना है।









