Saturday, April 18, 2026
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साहित्य-*जीवन की उम्मीद*… के. सी. राजपूत ✍

जीवन की उम्मीद …..

 

आ जाए यदि विकट परिस्थिति, तो जीवन से मुख ना मोड़ें ।

एक अंग यदि कट भी जाए तो , हम जीना क्यों छोड़े ?

उम्मीद करो जीवन की पुनि पुनि, और साहस से लो काम।

महती कृपा अगर ईश्वर की, तो चलता जीवन अविराम ।।

अभी जुड़ा हूं मैं पृथ्वी से, उससे पाता _ दाना पानी ।

मैं अकेला यहां नहीं हूं, पृथ्वी पर बहुत शेष हैं प्राणी ।।

उच्च खंड नहीं है मेरा, तब भी जीवन चलता है अविराम ।

संघर्ष कर रहा हूं जीवन से, बताऊं मेरा नाम है आम ।।

कोई दुख नहीं है मुझको, हैं मेरे कोई डाल न पात ।

हां छाया नहीं है मेरे ऊपर, झेल रहा आतप अरु घात।।

मैं धन्य, तू मेरी “भू” माता, सदा रहा है तेरा साथ ।

तेरे से ही तो मैं जन्मा,मेरे पर रखना सदा ही हाथ ।।

अत्यंत कठिन जीवन है मेरा, पर मुझको वंश बचाना है ।

अचला का वरदान मेरे संग, बस आगे बढ़ते जाना है ।।

फल तो मिल ही गया है देखो, आगे उम्मीद न छोडूंगा ।

कठिन काल कुछ भी आए, पर अपना मुख नहीं मोड़ूंगा।।

रचनाकार के.सी.राजपूत

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