जीवन की उम्मीद …..
आ जाए यदि विकट परिस्थिति, तो जीवन से मुख ना मोड़ें ।
एक अंग यदि कट भी जाए तो , हम जीना क्यों छोड़े ?
उम्मीद करो जीवन की पुनि पुनि, और साहस से लो काम।
महती कृपा अगर ईश्वर की, तो चलता जीवन अविराम ।।
अभी जुड़ा हूं मैं पृथ्वी से, उससे पाता _ दाना पानी ।
मैं अकेला यहां नहीं हूं, पृथ्वी पर बहुत शेष हैं प्राणी ।।
उच्च खंड नहीं है मेरा, तब भी जीवन चलता है अविराम ।
संघर्ष कर रहा हूं जीवन से, बताऊं मेरा नाम है आम ।।
कोई दुख नहीं है मुझको, हैं मेरे कोई डाल न पात ।
हां छाया नहीं है मेरे ऊपर, झेल रहा आतप अरु घात।।
मैं धन्य, तू मेरी “भू” माता, सदा रहा है तेरा साथ ।
तेरे से ही तो मैं जन्मा,मेरे पर रखना सदा ही हाथ ।।
अत्यंत कठिन जीवन है मेरा, पर मुझको वंश बचाना है ।
अचला का वरदान मेरे संग, बस आगे बढ़ते जाना है ।।
फल तो मिल ही गया है देखो, आगे उम्मीद न छोडूंगा ।
कठिन काल कुछ भी आए, पर अपना मुख नहीं मोड़ूंगा।।
रचनाकार के.सी.राजपूत





