ग़ज़ल
शकूर अनवर
लड़ने को तैयार बना।
अपना क़लम हथियार बना।।
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लफ़्ज़ों* में इक धार बना।
ग़ज़लों को तलवार बना।।
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पहले ख़ुद किरदार* बना।
फिर चाहे सरकार बना।।
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कश्ती को मॅंझधार में रख।
हाथों को पतवार बना।।
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लाख सितारे रोकेंगे।
क़िस्मत को हर बार बना।।
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बिगड़ी हुई इस दुनिया को।
एक नया संसार बना।।
सोच समझ कर खेल “अनवर”।
मोहरों में रफ़्तार* बना।।
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शब्दार्थ:-
लफ़्ज़ों*शब्दों
किरदार*चरित्र
रफ़्तार*गति
✍ शकूर अनवर
📞9460851271





