कोटा शैली की अनूठी पेंटिंग में महाराव भीम सिंह प्रथम की भक्ति और सेवा भाव, ब्रजनाथ जी के सामने राजसी भोग की मनोहारी झांकी
चित्रकार शंभूसिंह चौबदार✍️
कोटा। कोटा की प्रसिद्ध चित्रकला शैली अपनी बारीक कारीगरी, ऐतिहासिक प्रसंगों और राजदरबार की जीवंत झांकियों के लिए देश-दुनिया में पहचान रखती है। इसी परंपरा को दर्शाती एक अनूठी पेंटिंग में कोटा के महाराव भीम सिंह प्रथम को अपने पुत्र महाराज कुमार के साथ इष्टदेव ब्रजनाथ जी (भगवान श्रीकृष्ण) की सेवा करते हुए दर्शाया गया है।
इस पेंटिंग में महाराव भीम सिंह प्रथम और महाराज कुमार को ब्रजनाथ जी के समक्ष भक्ति एवं सेवा भाव के साथ उपस्थित दिखाया गया है। चित्र में महाराज कुमार को राजसिंहासन पर विराजमान दिखाया गया है। इसके पीछे कोटा राजघराने की वह धार्मिक परंपरा दिखाई देती है, जिसमें ब्रजनाथ जी को कोटा राज्य का वास्तविक शासक माना जाता था और महाराव स्वयं को उनके दीवान के रूप में देखते थे।
स्वर्ण थाल में भोग, हाथों में मोर पंखा और कमल
पेंटिंग का सबसे आकर्षक पक्ष भगवान ब्रजनाथ जी के समक्ष प्रस्तुत की जा रही सेवा है। महाराज कुमार शाही स्वर्ण थाल में भोग लेकर खड़े हैं और भगवान कृष्ण से भोजन ग्रहण करने का आग्रह करते दिखाई देते हैं।
वहीं महाराव भीम सिंह प्रथम मोर पंखे से ब्रजनाथ जी की सेवा करते नजर आते हैं। उनके हाथों में भगवान कृष्ण को प्रिय कमल पुष्प अर्पित करने की भावपूर्ण मुद्रा भी चित्रित की गई है। इस पूरी झांकी में राजसी वैभव के साथ-साथ भक्ति, विनम्रता और समर्पण का भाव दिखाई देता है।
चित्र में राजसी वैभव के साथ भक्ति का संगम
पेंटिंग केवल एक राजदरबार का दृश्य नहीं बल्कि कोटा राजपरिवार की धार्मिक आस्था और सेवा परंपरा को भी सामने लाती है। एक ओर महाराव और राजकुमार की राजसी उपस्थिति दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर इष्टदेव के प्रति उनका समर्पण और सेवाभाव चित्र का केंद्रीय भाव बनकर उभरता है।
कोटा शैली की चित्रकला में ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंगों को सूक्ष्म भाव-भंगिमाओं, वस्त्रों, आभूषणों और दरबारी परिवेश के माध्यम से जीवंत करने की परंपरा रही है। इस पेंटिंग में भी राजसी वातावरण और कृष्ण भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
स्वर्ण-रजत वर्क और प्राकृतिक रंगों से तैयार कलाकृति
यह कलाकृति हस्तनिर्मित कागज पर तैयार की गई है। इसमें स्वर्ण एवं रजत वर्क के साथ हिलकारी और पथरीले रंगों का प्रयोग किया गया है। पारंपरिक तकनीकों और हाथ से किए गए बारीक काम के कारण पेंटिंग में राजसी वैभव के साथ पुरानी कोटा चित्रकला की विशिष्ट चमक और सौंदर्य दिखाई देता है।
यह पेंटिंग कोटा की कला परंपरा में इतिहास, धर्म, राजसी संस्कृति और कलाकार की कल्पनाशीलता के अनूठे संगम का उदाहरण कही जा सकती है। महाराव भीम सिंह प्रथम की ब्रजनाथ जी के प्रति सेवा को केंद्र में रखकर बनाई गई यह कलाकृति दर्शकों को कोटा राजघराने की उस परंपरा से परिचित कराती है, जिसमें सत्ता से ऊपर इष्टदेव के प्रति समर्पण को विशेष महत्व दिया गया।






