Tuesday, October 6, 2026
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सुनार से आभूषण बनवाती राजपरिवार की महिलाएं, आंगन में तुलसी और पास बैठी बालिका के हाथ में मूली—एक चित्र में दिखी जीवन की पूरी तस्वीर

कोटा कलम की अनूठी पेंटिंग में झलकती है हाड़ौती की समृद्ध संस्कृति

शंभूसिंह चौबदार✍️

कोटा। कोटा शैली की चित्रकला, जिसे कोटा कलम के नाम से भी जाना जाता है, अपने बारीक चित्रांकन और तत्कालीन जीवनशैली को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने के लिए प्रसिद्ध रही है। इसी परंपरा से जुड़ी एक विशेष पेंटिंग में हाड़ौती के पुराने समय के समृद्ध परिवारों, उनके रहन-सहन, खान-पान, आभूषणों और धार्मिक भावनाओं की खूबसूरत झलक देखने को मिलती है।

इस विशेष पेंटिंग में सुनार राजपरिवार की महिलाओं को स्वर्ण-रजत आभूषण पहनाते हुए नजर आता है। सुनार महिलाओं के पुराने आभूषणों को ठीक करने के साथ-साथ उन्हें नए आभूषण पहनाता हुआ दिखाई देता है। यह दृश्य उस दौर में आभूषणों के प्रति महिलाओं के आकर्षण और सुनारों की पारंपरिक भूमिका को दर्शाता है।

पेंटिंग में सुनार के पास ही दो महिलाएं बैठकर इस कार्य को निहारती हुई दिखाई देती हैं। उनके परिधान, आभूषण और बैठने की मुद्रा उस समय के समृद्ध परिवारों की जीवनशैली और सामाजिक वातावरण की ओर संकेत करती है।

आंगन में तुलसी का पौधा, धार्मिक भावनाओं की झलक

इस चित्र की खासियत केवल राजसी ठाठ-बाट तक सीमित नहीं है। पेंटिंग के आंगन में तुलसी का पौधा भी दिखाई देता है। भारतीय परिवारों में तुलसी को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त रहा है। ऐसे में चित्रकार ने आंगन में तुलसी के पौधे को स्थान देकर तत्कालीन समाज की धार्मिक आस्थाओं और पारिवारिक संस्कारों को भी चित्र में शामिल किया है।

छोटी बालिका और हाड़ौती का खान-पान

पेंटिंग का एक और रोचक पहलू है—पास बैठी छोटी सी बालिका, जो मूली का सेवन करती हुई नजर आती है। यह छोटा सा दृश्य उस समय के सामान्य खान-पान और स्थानीय जीवनशैली की ओर ध्यान आकर्षित करता है।

एक ओर जहां पेंटिंग में स्वर्ण-रजत आभूषणों से सजा समृद्ध परिवार दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर एक बालिका का साधारण रूप से मूली खाना यह बताता है कि तत्कालीन जीवन में स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों का भी अपना महत्व था।

एक पेंटिंग में समाई हाड़ौती की पूरी कहानी

दरअसल, यह पेंटिंग सिर्फ सुनार और राजपरिवार की महिलाओं का दृश्य नहीं है, बल्कि हाड़ौती के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का एक दृश्य दस्तावेज प्रतीत होती है। इसमें धन-संपन्न परिवारों का रहन-सहन, आभूषणों के प्रति रुचि, पारंपरिक व्यवसाय, महिलाओं की सामाजिक भूमिका, धार्मिक आस्था और खान-पान—इन सभी पहलुओं को एक ही फ्रेम में समेटने का प्रयास दिखाई देता है।

कोटा कलम की विशेषता भी यही रही है कि इसके चित्रों में केवल सुंदरता नहीं, बल्कि अपने समय के समाज और जीवन की झलक देखने को मिलती है। बारीक रेखांकन और छोटे-छोटे विवरणों के माध्यम से चित्रकार ने उस दौर की संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने का काम किया।

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