✍️डॉ नयन प्रकाश गांधी ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट
भाजपा ने केंद्र, राज्य और शहरों में मिलकर ट्रिपल इंजन की सरकार बना ली है। अब बारी है भारत की आत्मा कहे जाने वाले गांव की। कहा जाता है कि भारत गांवों में बसता है, और लोकतंत्र की असली आत्मा भी गांव में ही बसती है। देश की अर्थव्यवस्था की नींव भी गांव से ही मजबूत होती है, क्योंकि ग्राम पंचायत ही लोकतंत्र की सबसे छोटी कड़ी है। इस कड़ी को मजबूत करना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसी को मजबूत करने के लिए अब राजस्थान में गांव की सरकार चुनी जा रही है।
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने 3 अक्टूबर 2026 को पंचायती राज चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। प्रदेश में कुल 4.03 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 4,03,07,308 वोटरों में 2,08,87,351 पुरुष, 1,94,19,789 महिला और 168 थर्ड जेंडर वोटर हैं, जो पिछले चुनाव से 6.22 प्रतिशत ज्यादा है। यह चुनाव चार चरण में होगा। जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को मतदान होगा। पंच और सरपंच के लिए 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को मतदान होगा। इस बार 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समिति और 14,403 ग्राम पंचायतों के लिए वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत एक साथ चुनाव हो रहे हैं।खास बात यह है कि यह चुनाव दशहरे से दिवाली के बीच हो रहे हैं, जब त्योहारों का दौर है और स्कूलों में बच्चों की अर्धवार्षिक परीक्षाएं भी हैं। तीसरे चरण के तहत 6 नवंबर को 3,605 ग्राम पंचायतों में मतदान होगा। पहले चरण में 3,672, दूसरे में 3,626 और चौथे चरण में 3,500 पंचायतों में मतदान होगा। मतलब घर में एक तरफ दिवाली की तैयारी चलेगी और दूसरी तरफ गांव अपनी अगले पांच साल की सरकार चुनेगा।पंचायत चुनाव को सिर्फ सरपंच, पंच या जिला परिषद सदस्य चुनने तक देखना गांव के साथ न्याय नहीं होगा। असली सवाल यह है कि नई पंचायत अगले पांच साल में गांव को देगी क्या? सालों से पंचायत की राजनीति सड़क, नाली, पानी की टंकी, हैंडपंप जैसे छोटे कामों के आसपास ही घूमती रही है। ये जरूरतें अपनी जगह जरूरी हैं, लेकिन गांव का भविष्य सिर्फ सीसी रोड और नाली से तय नहीं होगा। जिस गांव का नौजवान नौकरी के लिए शहर जा रहा है, जिस किसान की कमाई सिर्फ खेती पर टिकी है और जिस परिवार को इलाज या पढ़ाई के लिए शहर जाना पड़ता है, वहां विकास को बड़े नजरिए से देखना होगा।नई पंचायतों के सामने सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का होना चाहिए। छोटे व्यापार और स्थानीय काम-धंधों ,खेती के साथ पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तकला,स्मार्ट विलेज कॉन्सेप्ट
को बढ़ावा देकर गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है। आज गांव का युवा पढ़ाई पूरी करते ही शहर जाने को मजबूर होता है ,क्योंकि ग्राम पंचायते सरकार की राजनीति की भेट चढ़ जाती है ,या कही भ्रष्टाचार चरम सीमा पर होता है ,भ्रष्ट सरपंच चुनने से गांव विकास में जो योजना का पैसा आता है वह बीच में ही डकार लिया जाता है ,अब यह
न हो इसके लिए पार्टियों को भी सही उम्मीदवार को अपना सिंबल देना होगा और साथ ही गांव के विकास हेतु पंचायतों को सिर्फ सरकारी योजनाओं पर नहीं रहना चाहिए। उन्हें अपने गांव की ताकत को पहचानना होगा और वहीं रोजगार के मौके बनाने होंगे।पानी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और साफ-सफाई जैसी बुनियादी दिक्कतें आज भी कई गांवों में हैं। हर चुनाव में इन पर वादे होते हैं। अब नई पंचायतों से वादों से आगे बढ़कर काम करके दिखाने की उम्मीद होनी चाहिए। गांव को यह जानने का हक है कि उसके नाम पर आया पैसा कहां खर्च हुआ और धरातल पर कितना बदलाव आया। ग्रामसभा सिर्फ एक औपचारिक बैठक बनकर न रहे, बल्कि गांव की जरूरतें तय करने का असली मंच बने, यही पंचायती राज की पहली शर्त है।इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि कौन जीतेगा। सवाल यह भी होना चाहिए कि जो जीतेगा वह गांव के लिए क्या करेगा? क्या पांच साल का विकास का प्लान बनेगा? क्या युवाओं और महिलाओं को विकास में जगह मिलेगी? क्या योजनाओं का फायदा कागजों से निकलकर जरूरतमंद तक पहुंचेगा? और क्या चुना हुआ नुमाइंदा पांच साल बाद वोट मांगने से पहले अपने काम का हिसाब देगा?
और यहीं पर भजनलाल सरकार की सबसे बड़ी भूमिका बनती है। ट्रिपल इंजन अब चौथी कड़ी से जुड़ेगा ,गांव की सरकार से। जब दिल्ली से पैसा, जयपुर से योजना और गांव से ईमानदार नेतृत्व, ये तीनों कड़ियां एक साथ जुड़ेंगी, तब गांव में विकास की गंगा बहेगी। क्योंकि आम जन को समझना होगा कि कड़ी से कड़ी जोड़ने पर विकास गांव का ही होना हैं,अगर आगे भजनलाल सरकार हर पंचायत को सीधा सचिवालय से जोड़ती है , हर सरपंच को विकास का ब्रांड एंबेसडर बनाती है और पंचायती राज स्तर को मजबूत करती है तो वास्तव में एक लक्ष्य के साथ कड़ी से कड़ी जुड़ेगी, तभी गांव का पैसा गांव में लगेगा और गांव का विकास गांव में दिखेगा ,गांव में सबसे ज्यादा आवश्यकता है स्वच्छता पर ध्यान देने की ,उसके बाद स्वास्थ्य अधिकार ,आवास अधिकार और जरूरतमंद को सरकार की योजनाओं का समुचित लाभ एवं मूलभूत आवश्यक योजनाओ की आम अंतिम वर्ग तक पहुंच ,तभी कहा जाएगा कि राजस्थान का विकास गांव से शुरू हुआ है और मेरा मानना है वर्तमान भजनलाल सरकार इस कर्तव्य को पूरा करेगी बशर्ते गांव के मतदाता सही व्यक्ति को सरपंच बनाए जो सीधे विकास को गांव से जोड़े ।

डॉ नयन प्रकाश गांधी ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट






