Wednesday, September 16, 2026
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हिंदी केवल भाषा नहीं, हमारी राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक अस्मिता का सशक्त माध्यम है — डॉ. सुरेन्द्र यादवेंद्र

स्वातंत्र्योत्तर काव्य में राष्ट्रीय भावना विषय पर विचार एवं काव्य गोष्ठी सम्पन्न

जितेंद्र कुमार शर्मा✍️

बाराँ, 15 सितम्बर। हिन्दी दिवस के अवसर पर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, राजस्थान के राजकीय संग्रहालय बाराँ तथा युवा मंडल संस्थान बाराँ के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को राजकीय संग्रहालय बाराँ में “स्वातंत्र्योत्तर काव्य में राष्ट्रीय भावना” विषय पर विचार एवं काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों एवं साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना से हुआ। कवि सूरजमल मियाडा ने सरस्वती वंदना की। अतिथियों का स्वागत करते हुए संग्रहालय के सहायक प्रशासनिक अधिकारी संदीप सिंह जादौन ने कहा कि ” हिन्दी दिवस का आयोजन एवं चर्चा एक सार्थक कार्य है, ऐसे कार्य समाज में प्रेरणा का विषय बनते हैं।”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि डॉ. सुरेन्द्र यादवेंद्र ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हिन्दी कविता ने राष्ट्र के बदलते स्वरूप, सामाजिक सरोकारों, राष्ट्रीय एकता और आम आदमी की आकांक्षाओं को प्रभावी स्वर दिया है। राष्ट्रीय भावना केवल देशभक्ति के उद्घोष तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन में भी अभिव्यक्त होती है।

मुख्य वक्ता श्री प्रद्युम्न वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बाराँ ने कहा कि स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कविता में राष्ट्रीय चेतना अनेक रूपों में दिखाई देती है। कवियों ने लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक एकता, सीमा की रक्षा, ग्राम्य जीवन तथा राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को अपनी रचनाओं का आधार बनाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री हेमराज बंसल, कोषाध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बाराँ ने की। उन्होंने कहा कि हिन्दी हमारी भावनाओं, संवेदनाओं और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाली भाषा है।

विशिष्ट अतिथि श्री नाथूलाल निर्भय, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय कवि संगम, बाराँ ने कहा कि कविता में राष्ट्रप्रेम की सार्थकता हिंदी का मूल है। विशिष्ठ अतिथि व्यंग्यकार श्री मेवाराम चौधरी ने कहा कि व्यंग्य समाज की विसंगतियों को सामने लाकर लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करता है।विशिष्ट अतिथि श्री बच्छराज राजस्थानी, अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बाराँ ने साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।संयोजक श्री भैरूलाल भास्कर ने कहा कि हिन्दी दिवस जैसे आयोजन वर्षभर साहित्य और हिन्दी के प्रति सकारात्मक वातावरण निर्माण का माध्यम बनें।

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों एवं कवियों ने “स्वातंत्र्योत्तर काव्य में राष्ट्रीय भावना” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए तथा देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकार और राष्ट्रीय एकता से ओतप्रोत काव्य रचनाओं का पाठ किया।कार्यक्रम के अंत में युवा मंडल संस्थान बाराँ के प्रांतीय सचिव जितेन्द्र शर्मा पम्मी ने अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों एवं उपस्थित साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया गया।

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