Monday, April 20, 2026
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साहित्य- जीवन की जब ना गारंटी,फिर किस बात की गारंटी- बृजेंद्र सिंह झाला ‘पुखराज’

गारंटी

—-

जीवन की जब न गारंटी,

फिर किस बात की गारंटी ।

मात्र फ़ैकुओं का कलाम,

जो बना नाम है गारंटी ।।

इंसानियत कहीँ ज़िंदा हो,

उसूल अगर कहीँ जिंदा हो ।

जुबान लकीर है पत्थर की,

क्यों भला शर्मिंदा हो ।।

साफ कहो और सुखी रहो,

व्यर्थ में क्यों दुःखी रहो ।

रब पर विश्वास रखो रे,

सर्वदा अन्तर्मुखी रहो ।।

उसी पर ही रखो भरोसा,

नाम बना जो गारंटी ।

जीवन की जब न गारंटी,

फिर किस बात की गारंटी ।।

# स्वरचित/मौलिक/सर्वाधिकार सुरक्षित

# बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”,

कोटा (राजस्थान)

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