Monday, July 13, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

पंख देता है आत्मविश्वास, पंख काटता है अहंकार – परमानन्द गोयल

आत्मविश्वास हो, अहंकार नहीं — सफलता का वास्तविक आधार

पंख देता है आत्मविश्वास, पंख काटता है अहंकार – परमानन्द गोयल

सफलता केवल प्रतिभा, ज्ञान या परिश्रम का परिणाम नहीं होती; वह व्यक्ति के व्यक्तित्व का भी प्रतिबिंब होती है। यही कारण है कि समान योग्यता रखने वाले दो व्यक्तियों में एक सम्मान और विश्वास अर्जित करता है, जबकि दूसरा धीरे-धीरे लोगों से दूर हो जाता है। इस अंतर का सबसे बड़ा कारण है— आत्मविश्वास और अहंकार।

आत्मविश्वास वह आंतरिक शक्ति है जो व्यक्ति को चुनौतियों से संघर्ष करने, असफलताओं से सीखने और निरंतर आगे बढ़ने का साहस देती है। वह कहता है— “मैं प्रयास करूँगा, सीखूँगा और सफल होकर दिखाऊँगा।” इसके विपरीत अहंकार यह भ्रम पैदा करता है कि “मुझे सब कुछ आता है और मुझसे बेहतर कोई नहीं।” यही भ्रम व्यक्ति की प्रगति को रोक देता है।

आत्मविश्वासी व्यक्ति अपनी उपलब्धियों पर प्रसन्न होता है, लेकिन उनका प्रदर्शन नहीं करता। वह दूसरों के विचारों को ध्यान से सुनता है, उनकी सफलता से प्रेरणा लेता है और आवश्यकता पड़ने पर सहजता से स्वीकार करता है— “मुझे यह नहीं पता।” दूसरी ओर, अहंकारी व्यक्ति स्वयं को ही अंतिम सत्य मान बैठता है। वह प्रशंसा चाहता है, पर सलाह स्वीकार नहीं करता; श्रेय लेना चाहता है, पर उत्तरदायित्व से बचता है।

भारतीय संस्कृति ने सदैव विनम्रता को महानता का आधार माना है। “विद्या ददाति विनयम्” केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत है। भगवान राम का आत्मविश्वास उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाता है, जबकि रावण का अहंकार उसके अद्वितीय ज्ञान पर भी भारी पड़ जाता है। इतिहास का प्रत्येक युग यही संदेश देता है कि व्यक्ति अपनी शक्ति से नहीं, बल्कि अपने अहंकार से पराजित होता है।

यदि हम स्वयं को परखना चाहें तो तीन प्रश्न पर्याप्त हैं— क्या मैं दूसरों की बात पूरे धैर्य से सुनता हूँ? क्या मैं अपनी भूल स्वीकार कर सकता हूँ? और क्या किसी अन्य की सफलता मुझे ईर्ष्या नहीं, बल्कि प्रेरणा देती है? इन प्रश्नों के उत्तर हमारे व्यक्तित्व का वास्तविक दर्पण हैं।

जीवन में आगे बढ़ना है तो प्रतिदिन स्वयं को बेहतर बनाने का संकल्प लें। अपनी तुलना केवल अपने बीते हुए कल से करें, प्रत्येक सफलता पर ईश्वर, परिवार और सहयोगियों के प्रति कृतज्ञ रहें तथा जीवनभर सीखते रहने का स्वभाव बनाए रखें। यही आत्मविश्वास को सुदृढ़ और अहंकार को नियंत्रित रखने का सर्वोत्तम मार्ग है।

फलों से लदा वृक्ष झुक जाता है, नदियाँ गहराई के साथ शांत बहती हैं और वास्तव में महान व्यक्ति अपनी उपलब्धियों से नहीं, अपने विनम्र व्यवहार से पहचाना जाता है। इसलिए आत्मविश्वास को अपना साथी बनाइए, अहंकार को नहीं। क्योंकि आत्मविश्वास सफलता दिलाता है, लेकिन विनम्रता उस सफलता को स्थायी सम्मान में बदल देती है।

— परमानन्द गोयल

कोटा (राजस्थान)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles