गुडला टोल के पास रिटायर्ड शिक्षक दंपती की दर्दनाक मौत के बाद उठे कई सवाल—तेज रफ्तार, लापरवाही और फरार चालकों पर कब होगी सख्त कार्रवाई?
-मयूर सोनी
कोटा/कापरेन।राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं। लगभग हर दिन किसी न किसी परिवार की खुशियां सड़क हादसों की भेंट चढ़ रही हैं। कई दुर्घटनाएं इतनी भयावह होती हैं कि उनकी तस्वीरें और समाचार देखकर हर संवेदनशील व्यक्ति का हृदय द्रवित हो उठता है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर इन हादसों पर प्रभावी रोक कब लगेगी और दोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर कार्रवाई कब सुनिश्चित होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, यातायात नियमों की अनदेखी, ओवरलोड वाहन, खराब सड़कें तथा कमजोर निगरानी व्यवस्था सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। कई मामलों में दुर्घटना के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो जाता है, जिससे जांच प्रभावित होती है और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में देरी होती है।
कोटा–लालसोट मेगा हाईवे पर गुडला टोल के समीप गुरुवार दोपहर हुआ एक दर्दनाक हादसा पूरे हाड़ौती क्षेत्र को झकझोर गया। कापरेन निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक केदारलाल शर्मा जी (65) और उनकी पत्नी गीताबाई जी (62) बाइक से कोटा जा रहे थे। दोनों यातायात नियमों का पालन करते हुए अपनी लेन में चल रहे थे और सुरक्षा के लिए हेलमेट भी पहने हुए थे। तभी पीछे से आए तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रोले ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों ट्रोले की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रोला चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया।
इस घटना का सबसे भावुक पक्ष यह है कि दंपती अपने छोटे बेटे का जन्मदिन मनाने के लिए कोटा जा रहे थे। जिस घर में कुछ ही घंटों बाद जन्मदिन की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां माता-पिता के निधन की खबर पहुंचते ही मातम पसर गया। परिवार की खुशियां पलभर में शोक में बदल गईं।
मृतक दंपती, मेडिकल विभाग में कार्यरत साहित्यकार एवं अभिनेता राम शर्मा जी के माता-पिता थे। इस दुखद घटना से साहित्य, सामाजिक और चिकित्सा जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई है। पत्रकारों, साहित्यकारों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच कर फरार चालक को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए तथा उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी तो कानून का भय समाप्त होता जाएगा। सड़क हादसों को केवल एक सामान्य दुर्घटना मानकर छोड़ देना समाधान नहीं है। यदि जांच में किसी की लापरवाही या कानून का उल्लंघन सामने आता है, तो दोषियों को कठोर दंड मिलना आवश्यक है।
यह हादसा केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना, यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराना, तेज रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण, हाईवे पर आधुनिक निगरानी व्यवस्था विकसित करना तथा दोषियों के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हर सड़क दुर्घटना की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच हो और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। तभी पीड़ित परिवारों को न्याय मिलेगा, सड़कों पर लोगों का विश्वास कायम होगा और भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
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