बारां।राजस्थान के बारां जिले की शाहबाद तहसील अंतर्गत कलोनी गांव से शुरू हो रही 407.87 हेक्टेयर वन भूमि को राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद को हाइड्रो पावर प्लांट (निजी बिजली परियोजना) के लिए चिन्हित किया जाना, शाहबाद घाटी के अस्तित्व पर सीधा हमला है। इस परियोजना के नाम पर लाखों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की आशंका है, जिससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा बल्कि इस क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों व किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
परियोजना क्षेत्र से सटी कृषि भूमि को लेकर कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा किसानों पर जबरन दबाव बनाए जाने, डराने–धमकाने और मजबूर करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी की दादागिरी के चलते किसान अपनी जमीन बचाने में असहाय महसूस कर रहे हैं। किसानों में भारी आक्रोश है और पूरे क्षेत्र में भय व असंतोष का माहौल बना हुआ है।
इसी सिलसिले में पीड़ित किसान मदन जाटव पुत्र ओंकार लाल एवं राधे पुत्र गणेश लाल ने पुलिस अधीक्षक, बारां को लिखित परिवाद देकर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवाद में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि दबाव, धमकी और जमीन हड़पने जैसे कृत्य किए जा रहे हैं, जो कानून व संविधान दोनों का खुला उल्लंघन है।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां के संरक्षक प्रशांत पाटनी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—
“यह परियोजना विकास नहीं, विनाश का ब्लूप्रिंट है। जंगल काटकर, किसानों को डराकर और घाटी की सांसें घोंटकर बनने वाली बिजली हमें मंजूर नहीं। यदि एक भी पेड़ अवैध रूप से काटा गया या किसी किसान पर दबाव डाला गया, तो शाहबाद घाटी से जनआंदोलन की आग पूरे प्रदेश में फैलेगी।”
समिति के संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय ने चेतावनी देते हुए कहा
“कंपनी की गुंडागर्दी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह केवल जमीन का मामला नहीं, जल, जंगल और जमीन के अधिकार का प्रश्न है। प्रशासन यदि आंख मूंदे बैठा रहा तो जनता सड़कों पर उतरकर आर-पार की लड़ाई लड़ेगी। दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज हो और परियोजना पर रोक लगे।हमारी मांग है कि ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना पर तत्काल रोक।किसानों पर दबाव, धमकी व जबरन भूमि हड़पने के आरोपों की निष्पक्ष जांच।दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर व कानूनी कार्रवाई।शाहबाद घाटी के पर्यावरणीय विनाश पर अविलंब रोक।किसानों व ग्रामीणों की जान–माल और भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह संघर्ष राज्यव्यापी आंदोलन का रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित प्रशासन की होगी।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के युवा नेता गब्बर सिंह यदुवंशी ने दो टूक शब्दों में कहा—
“शाहबाद घाटी को कॉरपोरेट के हवाले करना सीधे-सीधे जंगल, किसान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है। हम साफ कहना चाहते हैं कि 407.87 हेक्टेयर वन भूमि पर किसी भी निजी बिजली परियोजना को किसी भी कीमत पर मंजूरी नहीं दी जाएगी। यदि लाखों पेड़ों की कटाई का एक भी प्रयास हुआ तो युवा शक्ति सड़कों पर उतरकर निर्णायक आंदोलन करेगी।”
उन्होंने आगे कहा—
“कंपनी द्वारा किसानों पर जमीन बेचने के लिए बनाया जा रहा दबाव अपराध की श्रेणी में आता है। यह विकास नहीं, बल्कि गरीब किसानों को कुचलने की साजिश है। दोषी कंपनी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।”
संघर्ष समिति के संयोजक भानु गुप्ता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा—
“शाहबाद घाटी केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, यह हमारा जल, जंगल और जीवन है। ग्रीनको कंपनी द्वारा किसानों को धमकाना और जबरन भूमि हड़पने की कोशिश लोकतंत्र और कानून दोनों का अपमान है। प्रशासन यदि मूकदर्शक बना रहा तो यह संघर्ष राज्यव्यापी जनआंदोलन में बदलेगा।”
उन्होंने प्रमुख मांगें रखते हुए कहा—
“हम मांग करते हैं कि ग्रीनको एनर्जी की हाइड्रो पावर परियोजना पर तत्काल रोक लगाई जाए। किसानों पर दबाव और धमकी देने वाले कंपनी अधिकारियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। शाहबाद घाटी की संपूर्ण वन भूमि को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया जाए।पीड़ित किसानों को प्रशासन द्वारा सुरक्षा और न्याय की गारंटी दी जाए।
पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए।”
अंत में दोनों नेताओं ने एक स्वर में कहा—
“अगर सरकार और प्रशासन ने समय रहते इस जनविरोधी परियोजना को नहीं रोका, तो शाहबाद घाटी से उठी यह आवाज पूरे राजस्थान में विकास के नाम पर हो रहे विनाश के खिलाफ जनक्रांति बनेगी।”





