*श्री निर्मल ज्ञान*
*इंग्लैंड के एक सहजी जो कार में श्री माताजी के साथ यात्रा कर रहे थे, श्री माताजी द्वारा उनको बताई गई कुछ विशेष बातें।*
• ध्यान के समय हमे सदा श्री माताजी के तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित करना है। उस दीप के अग्नि तत्त्व द्वारा उपस्थित नकारात्मकता को ग्रहण कर भस्म कर दिया जाता है।
हम जब भी श्री माताजी के समक्ष ध्यान में बैठे हमारे दोनो हाथों की हथेलियां पूर्ण रूपेण खुली होनी चाहिए। अधखुली हथेली के माध्यम से चक्र पूर्ण रूपेण क्रियान्वित नही हो पाते हैं और इसके कारण हम चैतन्य को पूरी तरह ग्रहण नहीं कर पाते है।
जब हम श्री माताजी का स्तुति गान (भजन) करते है तब हमे उसके साथ ताली अवश्य बजानी चाहिए और ध्यान रखना चाहिए की दोनो हथेलियों के चक्र एक समान ताली बजाते हुए आपस में सम्पर्क में आएं। इस प्रक्रिया से नकारात्मकता को नष्ट करने में बेहद सहायता मिलती है।
1986 में चैलशम रोड आश्रम (लंदन) की यात्रा पर श्री माताजी द्वारा हमारे गुरु तत्व को संतुलित करने हेतु बताए गए कुछ विशेष उपचार*
हमे कुछ कच्चा लहुसन कभी कभी अवश्य खाना चाहिए क्योंकि नकारात्मक शक्तियां लहुसन को बिल्कुल पसंद नही करती है। इसके साथ ही श्री माताजी ने बताया की हमे हरी मिर्च रोज खानी चाहिए। श्री माताजी ने यह भी बताया की हफ्ते में एक बार हमे थोड़ा सा बाइब्रेटेड नमक मिलाकर एक गिलास नमकीन पानी भी अवश्य पीना चाहिए। इन सबके बड़े ही चमत्कारिक परिणाम होते है।
मां द्वारा यह भी बताया गया की इन उपायों को करने से जिन लोगो को चक्रों की संवेदना महसूस नही होती है उनको भी होनी प्रारंभ हो जाएगी।
Ref: Recollections vol.3 1986, England




