Saturday, July 18, 2026
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बच्चों के लिए बिज़नेस की सीख – प्रैक्टिकल अनुभव से जीवन का पाठ

छोटे हाथ, बड़े सपने : अमेरिका के किड्स वेंडर्स फ़ेयर से बच्चों में उद्यमिता और सेवा के संस्कार

भारतीय संस्कृति की विशेषता रही है कि उसने सदैव अच्छी बातों को अपनाया है। किसी श्रेष्ठ व्यवस्था से प्रेरणा लेना नकल नहीं, बल्कि प्रगति का मार्ग है। आज जब बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन कौशल की भी आवश्यकता है, तब अमेरिका का किड्स वेंडर्स फ़ेयर एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर सामने आता है।

हाल ही में मेरी बेटी निकिता गोयल, जो अमेरिका में फिजियोथेरेपिस्ट हैं, ने बताया कि उनकी सात वर्षीय बेटी आरिया दूसरी बार किड्स वेंडर्स फ़ेयर में अपना स्टॉल लगाने जा रही है। पहले मुझे लगा कि यह सामान्य स्कूल मेला होगा, लेकिन इसकी अवधारणा जानकर महसूस हुआ कि यह बच्चों को बचपन से ही उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का अनूठा प्रयास है।

अमेरिका में अनेक हाउसिंग कम्युनिटीज़, चर्च, लाइब्रेरी और स्थानीय क्लब ऐसे मेले आयोजित करते हैं, जहाँ लगभग 12 वर्ष तक के बच्चे अपने हाथों से बनाई वस्तुएँ या छोटे उत्पाद बेचते हैं। कोई ब्रेसलेट बनाता है, कोई पेंटिंग, कोई कैंडल, कोई बुकमार्क या पुरानी पुस्तकें बेचता है। नाममात्र का पंजीकरण शुल्क लेकर आयोजक स्टॉल उपलब्ध कराते हैं और यही राशि स्थानीय चैरिटी, फूड बैंक, एनिमल शेल्टर या स्कूल फंड को दान कर दी जाती है। इस प्रकार बच्चे कमाई का आनंद भी लेते हैं और सेवा का संस्कार भी सीखते हैं।

भारत में भी कुछ विद्यालयों में ऐसे प्रयास होते हैं, लेकिन इन्हें व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है ताकि यह केवल वार्षिक कार्यक्रम न रहकर व्यक्तित्व विकास का प्रभावी माध्यम बन सके।

इसी संदर्भ में मुझे अपने बेटे प्रतीक का बचपन याद आता है। लगभग सात वर्ष की आयु में उसे दो किलोग्राम चीनी लाने भेजा गया। उसने एक किलो दूर की दुकान से और एक किलो पास की दुकान से खरीदी। घर आकर दोनों की तुलना करते हुए उसने कहा कि एक दुकान की चीनी मात्रा में कम लग रही है, इसलिए आगे से दूसरी दुकान से ही किराना लेना चाहिए। इतनी छोटी उम्र में मूल्य, गुणवत्ता और मात्रा का यह विश्लेषण उसकी स्वाभाविक व्यावसायिक सोच का परिचायक था। बचपन की यही आदत आगे चलकर उसके सफल व्यवसायी बनने की मजबूत नींव बनी।

इस बार आरिया ने अपने हाथों से बनाए रंग-बिरंगे बुकमार्क और फ्रेंडशिप बैंड बेचने का निर्णय लिया। उसने पहले से योजना बनाई, लागत निकाली, मूल्य तय किया और बिक्री की तैयारी की। यह केवल हस्तकला नहीं, बल्कि योजना, निर्णय और आत्मनिर्भरता का वास्तविक अभ्यास था।

ऐसे आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास, संवाद-कौशल, रचनात्मकता, जिम्मेदारी, समय प्रबंधन, धन का मूल्य और उद्यमिता की समझ स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। ग्राहकों से विनम्रता से बात करना, असफलता से सीखना और अपनी मेहनत का सम्मान करना—ये ऐसे जीवन कौशल हैं जिन्हें कोई पाठ्यपुस्तक पूरी तरह नहीं सिखा सकती।

इस फेयर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि व्यवसाय के साथ सेवा का भाव भी जुड़ा रहता है। बच्चों को यह अनुभव कराया जाता है कि उनकी छोटी-सी भागीदारी से किसी जरूरतमंद की सहायता हुई है। इससे उनमें कमाई के साथ करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव भी विकसित होता है।

आज हमारी आवासीय सोसायटियाँ, विद्यालय, सामाजिक संस्थाएँ और क्लब भी ऐसे आयोजन प्रारंभ कर सकते हैं। यदि पंजीकरण शुल्क या आय का एक भाग गौशाला, वृद्धाश्रम, अनाथालय या जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए समर्पित किया जाए, तो यह पहल और भी सार्थक बन सकती है।

आरिया अभी केवल सात वर्ष की है, लेकिन उसने जो सीखा, वह किसी भी कक्षा की शिक्षा से कहीं अधिक व्यापक है। निकिता के शब्द आज भी मेरे मन में गूंजते हैं—“मम्मी, यहाँ बच्चे केवल सामान बेचना नहीं सीखते, बल्कि आत्मनिर्भर, जिम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनना सीखते हैं।”

इस प्रकार के फेयर की एक और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि स्थानीय व्यवसायी बच्चों के छोटे-छोटे उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रायोजक (स्पॉन्सर) भी बनते हैं। अमेरिका में कार्यरत मेरी बेटी निकिता गोयल ने बताया कि उन्होंने भी अपने फिजियोथेरेपी एवं वेलनेस सेंटर “Active Fit 360” के माध्यम से ऐसे एक किड्स वेंडर्स फेयर को प्रायोजित किया। इससे न केवल बच्चों को आर्थिक सहयोग मिलता है, बल्कि समाज और व्यवसाय जगत की ओर से उनके प्रयासों को सम्मान एवं प्रोत्साहन भी प्राप्त होता है। यह साझेदारी बच्चों में आत्मविश्वास, नवाचार और उद्यमिता की भावना को और अधिक सशक्त बनाती है ।

एक परिवार के लिए इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है कि उसकी नातिन इतनी छोटी उम्र में कमाना भी सीख रही है और समाज को लौटाना भी। वास्तव में, छोटे हाथों से शुरू होने वाले ऐसे अनुभव ही आने वाले कल के बड़े सपनों की सबसे मजबूत नींव बनते हैं।

— भारती गोयल

कोटा (राजस्थान

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