Thursday, August 27, 2026
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दबे पांव आता है स्किज़ोफ्रेनिया, इससे सतर्क रहें.. डॉक्टर एम एल अग्रवाल

विश्व स्किज़ोफ्रेनिया दिवस

विश्व में एक प्रतिशत आबादी स्किज़ोफ्रेनिया रोग से ग्रस्त.

विश्व स्किजोफ्रेनिया दिवस पर आम जन में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु “समावेश जरूरी – एक सामूहिक जिम्मेदारी” संदेश जारी किया है। स्किज़ोफ्रेनिया एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य मानसिक रोग है इसमें व्यक्ति की सोच भावनाओं और व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है संपूर्ण विश्व में एक प्रतिशत और हमारे देश में इसके एक करोड़ 35 लाख मरीज है। समय पर रोग की पहचान उचित उपचार एवं परिवार के सहयोग से रोगी सामान्य एवं सम्मानजनक जीवन जी सकता है। *वरिष्ठ मनोरोग चिकित्सक एवं होप समिति के अध्यक्ष डॉ एम एल अग्रवाल* के अनुसार स्किज़ोफ्रेनिया के रोगियों में भ्रम, अजीब अजीब आवाजें सुनाई देना, शक की भावना, पढ़ाई या काम में रुचि न होना, दैनिक व्यवहार में बदलाव, बिना कारण का शक करना जिससे पति-पत्नी के संबंधों में तनाव जो कि तलाक तक पहुंच जाता है, खुदकुशी का विचार करना ऐसे अनेक लक्षणों के बारे में बताया। ऐसे में मरीज से किस तरह का व्यवहार देखभाल की जाए ताकि मरीज शीघ्र ठीक हो सके। कई बार आमजन इसे अंधविश्वास या कमजोरी समझते हैं जबकि यह एक मेडिकल स्थिति है जिसका इलाज संभव है, यह रोग अनुवांशिक भी हो सकता है इसके लक्षण सर्वप्रथम 18 से 28 वर्ष की उम्र में पता चलते हैं यह रोग महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक होता है। इस रोग में पॉजिटिव और नेगेटिव लक्षण होते हैं जिसमें नेगेटिव लक्षण ज्यादा हो सकते हैं जिससे परिवारजन इस बीमारी को स्वीकार नहीं करते हैं और प्रॉपर इलाज शुरू नहीं हो पाता है, धीरे-धीरे यह बीमारी लाइलाज होती जाती है और मरीज तथा उसके परिवार की सामाजिक आर्थिक समस्याएं बढ़ जाती है।

*डॉ अविनाश बंसल सचिव होप सोसायटी* ने बताया कि दवाइयां, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पारिवारिक सहयोग तथा नियमित फॉलोअप से रोग नियंत्रित किया जा सकता है। इसका पूरा इलाज कराना जरूरी है बीच में इलाज़ बंद करने से समस्या दोबारा बढ़ सकती है।

*कार्यक्रम समन्वयक सुधीन्द्र गौड़* ने बताया कि लगातार चिकित्सक की सलाह का पालन नितांत आवश्यक है इस बारे में अनेक भ्रांतियां को दूर करना भी जरूरी है जैसे कि दवाइयां और उपचार में फायदा नहीं होता है ऐसे मरीज लड़ाकू, तोड़फोड़ करने वाले होते हैं और दूसरों पर आश्रित होते हैं, जो कि सच नहीं है ऐसे में आम जन से अपील है कि मानसिक रोगी से भेदभाव और नफरत की भावना समाप्त करें। यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं तो इसे छुपाने की बजाय मानसिक रोग विशेषज्ञ से परामर्श लिया जाए। परिवार और समाज का सहयोग रोगी के आत्मविश्वास एवं पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है लिए विश्व स्किज़ोफ्रेनिया दिवस पर हम सभी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बने और यह संदेश फैलाए कि मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह उपचार योग्य हैं। सहानुभूति सहयोग और समय पर उपचार ही सबसे बड़ा सहारा है।

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