Friday, September 25, 2026
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शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन की महारैली – जनआक्रोश का ऐतिहासिक प्रदर्शन

शाहबाद/ बारां /शाहबाद क्षेत्र के जंगलों को बचाने के संकल्प के साथ आज शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन की ऐतिहासिक महारैली का आयोजन किया गया। इस विशाल जनसमूह ने पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता की रक्षा और स्थानीय जनजीवन के अधिकारों के लिए एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद की। रैली में युवाओं, किसानों, आदिवासी समुदाय, सामाजिक संगठनों एवं पर्यावरण प्रेमियों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली।

महारैली के दौरान दोपहिया वाहनों, पैदल मार्च और जनसभा के माध्यम से हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से यह संदेश दिया कि शाहबाद के जंगल किसी भी प्रकार की अवैज्ञानिक कटाई, खनन अथवा विकास के नाम पर विनाश के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। रैली मार्ग पर जगह-जगह “जंगल बचेगा, जीवन बचेगा”, “विकास चाहिए, विनाश नहीं” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।

आंदोलन के प्रमुख संयोजक रोबिन सिंह ग्रीन इंडिया मूवमेंट , शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के युवा नेता गब्बर यदुवंशी, शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय कोटा, डॉ. सुधांशु कुमार फाउंडर ग्रीन इंडिया पार्टी जयपुर ,सोशल मीडिया वर्कर लविश गुर्जर एवं विट्ठल सनाढ्य संयोजक पीपुल्स फॉर एनिमल्स बूंदी, यज्ञदत्त हाडा संयोजक चंबल संसद कोटा, डॉ सुधीर गुप्ता हमलोग संस्था कोटा ने संयुक्त रूप से कहा कि “शाहबाद के जंगल केवल हरियाली नहीं, बल्कि जल-स्रोतों, वन्यजीवों, स्थानीय रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का विकास तभी स्वीकार्य होगा जब वह पर्यावरण-संतुलन, स्थानीय सहमति और वैज्ञानिक आकलन पर आधारित हो।

नेताओं ने SDM शाहबाद को प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गये ज्ञापन में प्रशासन से मांग की कि प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट को तुरंत रद्द किया जाए और

शाहबाद जंगल क्षेत्र में चल रही प्रस्तावित विनाशकारी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

पर्यावरण प्रभाव आकलन की पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए।

स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाए

वन्यजीव संरक्षण और जल-संरक्षण के ठोस उपाय लागू किए जाएं।

जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि जंगलों के संरक्षण की मांगों को अनदेखा किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं लोकतांत्रिक तरीकों से तेज किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने प्रशासन और सरकार से संवाद के लिए दरवाजे खुले रखने की बात दोहराई। यह महारैली शाहबाद नगरकोट माताजी मंदिर पर विशाल जनसमूह की सभा के बाद पूरे शाहबाद कस्बे में नारे लगाते हुए sdm शाहबाद ऑफिस पर वाहन रैली और पैदल रैली के रूप में पहुंची ।

महारैली के समापन पर आंदोलनकारियों ने शांतिपूर्ण संकल्प लिया कि वे कानून के दायरे में रहकर शाहबाद के जंगलों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करेंगे। आज की महारैली ने यह स्पष्ट कर दिया कि शाहबाद की जनता अपने जंगलों के साथ खड़ी है और उनके संरक्षण के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है।

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