भारत सिंह चौहान
कोटा/डेढ़ वर्ष पूर्व केशवराय पाटन, कोटा की सड़कों पर लावारिस अवस्था में भटक रहे एक वृद्ध को *‘अपना घर आश्रम’* ने सहारा दिया था। आश्रम पहुंचने पर उन्होंने अपना नाम *त्रिवेणी पासवान* बताया, लेकिन स्मृति-लोप के कारण वे अपने घर-परिवार के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं बता पा रहे थे।
आश्रम के विशेषज्ञ चिकित्सकों की निरंतर देखरेख, उपचार और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के बाद धीरे-धीरे उनकी स्मृति लौटने लगी। उन्होंने बताया कि वे *पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग* के निवासी हैं।
आश्रम प्रबंधन ने तत्परता से उनके बताए पते पर संपर्क साधा। पता चला कि वे *श्याम पासवान के पिता* हैं। सूचना मिलते ही पुत्र श्याम पासवान अपने रिश्तेदार *अनमोल कुमार* के साथ तत्काल दार्जिलिंग से कोटा के लिए रवाना हो गए।
‘अपना घर आश्रम’ में जैसे ही पिता-पुत्र का आमना-सामना हुआ, दोनों की आँखें भर आईं और भावुकता से गला रुंध गया।* दो वर्ष का बिछोह एक आलिंगन में सिमट गया।
श्याम पासवान ने बताया, _“पिताजी पिछले कई वर्षों से मानसिक अस्वस्थता से जूझ रहे थे और लगभग दो वर्ष पूर्व अचानक घर से लापता हो गए थे। हमने हर जगह तलाश की, थक-हारकर उम्मीद छोड़ दी थी। अपना घर आश्रम ने हमें नई जिंदगी दी है। हम जीवनभर आश्रम के आभारी रहेंगे।”












