अखिल नामा
बारां।जैन धर्म के प्रख्यात संत आचार्य श्री आनन्द सागर सूरी जी महाराज साहब ने शाहबाद जंगल में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट के लिए लाखों बेशकीमती पेड़ों की कटाई को पूर्णतः अनुचित और विनाशकारी बताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल जंगल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पर्यावरणीय संतुलन व्यवस्था पर गहरा आघात है।
आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि इस प्लांट के स्थापित होने से शाहबाद जंगल की जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी, वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होंगे और जंगल पर आश्रित वनवासी समुदायों को विस्थापन, पलायन तथा रोज़ी-रोटी के गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इसे विकास के नाम पर प्रकृति और मानवता दोनों के साथ अन्याय करार दिया।
विज्ञान नगर स्थित विज्ञान नगर कोटा स्थानक में प्रवास के दौरान दिए गए प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा कि “प्रकृति की रक्षा करना केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक कर्तव्य भी है। जंगल बचेगा तभी जीवन बचेगा।” उन्होंने इस मुद्दे पर ओसवाल जैन समाज कोटा से एकजुट होकर आगे आने, लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से विरोध दर्ज कराने तथा ‘जंगल बचाओ’ आंदोलन को मजबूती देने का आव्हान किया।
इस अवसर पर शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के सम्भागीय संयोजक राजेंद्र कुमार जैन ने आचार्य श्री से भेंट कर परियोजना की वास्तविक स्थिति, संभावित पर्यावरणीय नुकसान, स्थानीय समुदायों की समस्याओं तथा जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह जंगल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण जैव-परिसंपदा है, जिसकी रक्षा करना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
आचार्य श्री ने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सत्य, अहिंसा और सामूहिक चेतना के बल पर ही इस प्रकार की विनाशकारी योजनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने सभी समाजों, संगठनों और जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे शाहबाद जंगल को बचाने के लिए आगे आएँ और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य हेतु अपना योगदान दें।






