Saturday, August 29, 2026
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शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत हस्ताक्षर अभियान, 1001 हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन प्रधानमंत्री, पर्यावरण मंत्री एवं सर्वोच्च न्यायालय को भेजा गया

जितेंद्र कुमार शर्मा

बारां,11 मई।शाहबाद घाटी के प्राकृतिक जंगल, जैव-विविधता और स्थानीय जनजीवन की रक्षा के उद्देश्य से चल रहे “शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन” के अंतर्गत शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां द्वारा एक व्यापक जन हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया। अभियान के माध्यम से आम नागरिकों ने शाहबाद क्षेत्र में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट को अन्यत्र स्थापित किए जाने की पुरज़ोर मांग की।

समिति द्वारा एकत्र किए गए 1001 हस्ताक्षरों से युक्त ज्ञापन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव तथा देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश के नाम प्रेषित कर समिति की मांग औपचारिक रूप से रखी गई।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि शाहबाद घाटी घने वनों, दुर्लभ वन्यजीवों, जलस्रोतों और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यहां प्रस्तावित हाइड्रो पावर परियोजना से जंगलों के विनाश, जैव-विविधता को अपूरणीय क्षति, जल प्रवाह में बाधा तथा स्थानीय समुदायों के आजीविका स्रोतों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। समिति ने यह भी रेखांकित किया कि विकास आवश्यक है, किंतु वह पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

संरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य भानु गुप्ता, मुकेश सोनी और अन्य सदस्यों ने सरकार से आग्रह किया कि स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हाइड्रो पावर प्लांट को पर्यावरण की दृष्टि से कम संवेदनशील वैकल्पिक स्थल पर स्थापित किया जाए, ताकि विकास और संरक्षण दोनों में संतुलन बना रहे। समिति ने पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन, स्थानीय जनसुनवाई और विशेषज्ञों की राय को निर्णायक प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की मांग भी की।

हस्ताक्षर अभियान में बड़ी संख्या में नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और युवाओं की सहभागिता रही। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार और न्यायपालिका इस विषय पर संवेदनशील एवं न्यायोचित निर्णय लेंगी, जिससे शाहबाद घाटी की प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।

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