कोटा/उर्दू के वरिष्ठ शायर प्रोफेसर एहतेशाम अख्तर,,पाशा,,के निधन से कोटा के साहित्य जगत में शोक की लहर फैल गई है।विकल्प के उपाध्यक्ष और ,,हम सुखन,,के सचिव शकूर अनवर ने बताया कि प्रोफेसर एहतेशाम अख्तर अलीगढ़ से उर्दू में एम ए करने के बाद 1973 में गवर्नमेंट कॉलेज कोटा में उर्दू के लेक्चरर नियुक्त हुए यहीं पर उर्दू विभाग के।अध्यक्ष बने आखिर में झालावाड़ कॉलेज से वाइस प्रिंसिपल के पद से 2002 में रिटायर्ड हुए।निधन के समय वह 82 वर्ष के थे।
,,,,,शकूर अनवर ने बताया कि उर्दू शायरी में नई सोच और आधुनिकता के पक्षधर पाशा साहब की कई किताबें प्रकाशित हुई हैं -राख,नीला आकाश,सुबह का सितारा ये उर्दू साहित्य में चर्चित काव्य संग्रह रहे हैं।
,,दरिया के किनारे,,और ,,अंदाज़ ए नज़र,, उनकी निबंधों की किताबें हैं।बीच में ,,सोंधी मिट्टी की खुशबू,, नाम से एक हिंदी ग़ज़ल संग्रह भी प्रकाशित हुआ है।
,,, प्रोफेसर एहतेशाम अख्तर कई साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित हुए है।पिछले दिनों राजस्थान उर्दू अकादमी ने भी ,,महमूद शीरानी,, अवॉर्ड से नवाजा था।
,,,,विकल्प जनसांस्कृतिक मंच कोटा ने भी पाशा साहब को वर्ष 2017 का विकल्प सृजन सद्भावना सम्मान दिया था।इस दुखद अवसर पर ज़फ़र अहमद परवाज़ साहब,तौफीक कोटवी,महेंद्र नेह,अंबिका दत्त, डॉ नरेंद्रनाथ चतुर्वेदी, दिनेश राय द्विवेदी,शकूर अनवर,अहमद सिराज फारूकी, डॉ जेबा फिज़ा, फ़ानी जोधपुरी,चांद शेरी,हलीम आईना,किशन लाल वर्मा,बद्रीलाल दिव्य,
बृजेंद्र कौशिक,सलीम आफरीदी, फिरोज़ अहमद, ए जमील कुरैशी, डॉ अनिता वर्मा,शरद तैलंग,प्रो हितेश व्यास,शून्य आकांक्षी,आदि रचनाकारों ने अपना शोक प्रकट किया।










