कोटा/कोटा आज विज्ञान नगर स्थित एक निजी स्कूल में बैसाखी के मौके पर जालियां वाला बाग में जमा लोगों की अंग्रेज फौज के हाथों हुई शहादत पर शहीदों को याद किया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए ए. एम. पी. कोटा प्रभारी इंजी. सिराज अहमद अंसारी ने कहा कि, जालियां वाला बाग कांड हमे देश के लिए मर मिटने वाले उन शहीदों की याद दिलाता हैं। जिन्हें अंग्रेज फौज ने सामूहिक नरसंहार में शहीद कर दिया।
एक उम्मीद सेवा संस्था के अध्यक्ष डॉ. रियाज़ खान ने कहा कि,13 अप्रैल 1919, बैसाखी का दिन—खुशियों का पर्व—लेकिन भारतीय इतिहास में यह दिन एक गहरे घाव के रूप में दर्ज है। जालियां वाला बाग नरसंहार ने ब्रिटिश शासन की क्रूरता को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया।
जालियां वाला बाग में हजारों निहत्थे लोग एकत्र थे, इस कांड में मुसलमान भी बड़ी संख्या में शहीद हुए, क्योंकि उस दिन बैसाखी के अवसर पर सभा में सभी समुदायों के लोग मौजूद थे।
यह घटना हिंदू-मुस्लिम-सिख एकता का भी प्रतीक मानी जाती है, क्योंकि तीनों समुदायों ने मिलकर अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया था। जब ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर ने बिना चेतावनी गोलियाँ चलाने का आदेश दिया। यह केवल एक गोलीबारी नहीं थी, बल्कि इंसानियत और न्याय के मूल्यों पर सीधा हमला था।
जालियांवाला बाग के शहीद हमें याद दिलाते हैं कि आज़ादी केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है।इस अवसर पर वाई. जी. एन.कोचिंग के निदेशक अरशद अंसारी ने कहा कि, इन कार्यक्रमो के जरिए देश प्रेम की भावना पैदा की जाती है.
कार्यक्रम संचालन नूर अहमद पठान ने किया। कार्यक्रम में अल्फेज़, जैद कुरैशी आदि मौजूद थे।






