Tuesday, August 25, 2026
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अहिंसा, संयम और सत्य का अमर संदेश — महावीर जयंती पर विशेष 

संसार के इतिहास में तप, त्याग और आत्मसंयम की पराकाष्ठा का सजीव उदाहरण हैं भगवान महावीर। दिगंबर मुनियों का जीवन — बिना वस्त्र, बिना जूते-चप्पल, आजीवन दवाइयों और सीमित आहार और सुख-सुविधाओं का पूर्ण त्याग — उनकी महान आंतरिक साधना का प्रतीक है, जिसे देखकर सामान्य व्यक्ति आश्चर्यचकित रह जाता है।

इसी परंपरा को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जैसे संतों ने अपने जीवन से जीवंत किया, जिन्होंने आत्मकल्याण और लोकमंगल के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया।

भगवान महावीर ने पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और वनस्पति में भी चेतना को स्वीकार कर अहिंसा का व्यापक स्वरूप प्रस्तुत किया। उनका संदेश केवल मनुष्य तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के प्रति करुणा और संवेदनशीलता का आह्वान करता है।

आज के हिंसा और तनावपूर्ण वातावरण में उनके सिद्धांत —

अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह — मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं।

महावीर जयंती हमें आत्मचिंतन, संयम और नैतिक जीवन अपनाने की प्रेरणा देती है। यदि हम उनके उपदेशों को अपने जीवन में उतारें, तो एक शांतिपूर्ण, संतुलित और समरस समाज का निर्माण संभव है।

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जम्बू जैन सर्राफ

अध्यक्ष, पुण्योदय अतिशय क्षेत्र

नसियां जी दादाबाड़ी, कोटा

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