-जितेंद्र कुमार शर्मा
शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन ने पकड़ा उग्र जनआंदोलन का रूप
बारां / शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत 22 मार्च को शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां के आह्वान पर बारां से शाहबाद तक आयोजित जनजागृति विरासत यात्रा ने पूरे क्षेत्र में जनचेतना की लहर दौड़ा दी। सैकड़ों की संख्या में जुटे आंदोलनकारियों ने सरकार और ग्रीनको के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि शाहबाद के जंगल किसी भी कीमत पर कटने नहीं दिए जाएंगे।
यात्रा की शुरुआत श्रीराम स्टेडियम, बारां से हुई, जहां समिति के संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय ने अपने तीखे उद्बोधन में कहा कि “विकास के नाम पर विनाश अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जंगल बचेंगे तभी जीवन बचेगा।” उन्होंने सरकार से पर्यावरणीय संतुलन के साथ निर्णय लेने की मांग की।
किशनगंज में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता रोबिन सिंह ने आंदोलन को राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए कहा कि “शाहबाद घाटी केवल बारां की नहीं, पूरे देश की प्राकृतिक धरोहर है। यहां पावर प्लांट लगाना पर्यावरणीय अपराध होगा।”
भंवरगढ़ में जागो किसान आंदोलन के अध्यक्ष वरदान सिंह हाडा ने किसानों की पीड़ा सामने रखते हुए चेताया कि जंगल कटे तो खेती, पानी और भविष्य—तीनों खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान इस लड़ाई में पीछे हटने वाला नहीं है।
केलवाड़ा में लेडी इंटेक की चेयरमैन नीता शर्मा ने महिला शक्ति की ओर से पर्यावरण संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि “जंगल बचाना हमारी पीढ़ी की जिम्मेदारी है, नहीं तो आने वाली नस्लें हमें माफ़ नहीं करेंगी।”
समरानियां में गब्बरसिंह यदुवंशी के जोशीले और उत्तेजक उद्बोधन ने आंदोलन में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि जंगल काटने का प्रयास हुआ तो जनआंदोलन और उग्र रूप लेगा।
यात्रा का समापन शाहबाद में हुआ, जहां सभी वक्ताओं और आंदोलनकारियों ने संयुक्त रूप से हुंकार भरते हुए प्रशासन को चेताया। इसके पश्चात एडीएम जब्बरसिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पावर प्लांट को अन्यत्र स्थापित करने तथा शाहबाद जंगल की कटाई तत्काल रोकने की मांग की गई।
आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि शाहबाद घाटी के जंगल केवल हरियाली नहीं, बल्कि जीवन, पानी और भविष्य की गारंटी हैं, और इनके संरक्षण के लिए संघर्ष निर्णायक मोड़ तक जारी रहेगा।






