Friday, August 28, 2026
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श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गणगौर महोत्सव, मांगा अखंड सौभाग्यवती का वरदान

भारत सिंह चौहान

बारां/ अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल चेतनाशक्ति सम्मेलन की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष सपना गोयल ने बताया गणगौर राजस्थान और मध्य भारत का एक प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है, जो चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। यह त्योहार माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) को समर्पित है। इसका मुख्य महत्व वैवाहिक सुख, पति की लंबी आयु, सौभाग्य और कुंवारी लड़कियों के लिए मनचाहे वर की प्राप्ति माना जाता है।

विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सोलह श्रृंगार करके माता गौरी की पूजा करती हैं। अविवाहित लड़कियां माता पार्वती से अच्छे और मनपसंद जीवनसाथी का आशीर्वाद पाने के लिए यह व्रत रखती हैं यह त्यौहार माता पार्वती की शिवजी के प्रति अटूट आस्था और समर्पण को दर्शाता है, जिसे गणगौर के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व राजस्थान की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है, जिसमें घूमर नृत्य, पारंपरिक गीत और मिट्टी की मूर्तियों की पूजा की जाती है।गणगौर से एक दिन पहले ‘सिंजारा’ मनाया जाता है, जिसमें विवाहित महिलाओं को उनके मायके से कपड़े, गहने और मेहंदी भेजी जाती है। यह त्योहार मां गौरी की मायके से ससुराल विदाई का प्रतीक है, जिसे धूमधाम से विसर्जित किया जाता है।

संक्षेप में, गणगौर नारी शक्ति, श्रद्धा, प्रेम और वैवाहिक पवित्रता का एक महत्वपूर्ण उत्सव है।

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