ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के साथ कोटा में एविएशन शिक्षा के नए द्वार की जगी संभावनाएँ– परमानन्द गोयल
कोटा और समूचे हाड़ौती क्षेत्र के विकास में 7 मार्च का दिन एक नए युग का संकेत लेकर आया है। एक ओर जहाँ कोटा ही नहीं, बल्कि पूरे हाड़ौती क्षेत्र के भविष्य से जुड़ी बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना का शिलान्यास हुआ, वहीं दूसरी ओर विमानन (एविएशन) शिक्षा के नए द्वार खुलने की संभावना भी प्रकट हुई है। देश भर से डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर “एजुकेशन सिटी” कोटा आने वाले विद्यार्थियों के लिए अब आकाश में उड़ान भरने के सपने भी साकार हो सकते हैं।
विकास की नई सौगात: ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
कोटा में लगभग 1507 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित किया जा रहा है। इसका लगभग 20,000 वर्गमीटर का विशाल टर्मिनल भवन एक समय में लगभग 1000 यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। यहाँ बनने वाली आधुनिक हवाई पट्टी पर एयरबस A-321 जैसे बड़े यात्री विमान भी आसानी से लैंडिंग कर सकेंगे और उड़ान भर सकेंगे। इसके बनने से कोटा का वायु मार्ग से संपर्क देश के प्रमुख महानगरों से स्थापित होगा और क्षेत्र के आर्थिक, औद्योगिक तथा पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी।
पुराने एयरपोर्ट को मिल सकता है नया जीवन
नए एयरपोर्ट के शिलान्यास समारोह में एक दूरदर्शी विचार भी सामने आया।
कोटा का पुराना एयरपोर्ट लगभग 447 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इसका रनवे लगभग 1200 मीटर लंबा है और टर्मिनल भवन लगभग 400–500 वर्गमीटर का है।
कार्यक्रम में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोटा एक एजुकेशन सिटी , जहाँ देश भर से बड़ी संख्या में छात्र आते हैं, यहाँ फ्लाइंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित करने की संभावना के संदर्भ में कोटा-बूंदी के सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी द्वारा उठाई गई पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार के साथ सकारात्मक चर्चा का संकेत भी दिया।
यदि यह योजना साकार होती है तो पुराने एयरपोर्ट का बेहतर उपयोग हो सकेगा और कोटा में विमानन प्रशिक्षण की नई शुरुआत हो सकती है।
हाड़ौती की प्रतिभाओं की ऊँची उड़ान
यह एक सुखद संयोग है कि जिस दिन कोटा में विमानन क्षेत्र की नई संभावनाओं पर चर्चा हो रही थी, उसी दिन हाड़ौती क्षेत्र के अंता उपखंड के गाँव अलीपुरा की बेटी रिशिना शर्मा ने वायु सेना अकादमी से अपना प्रशिक्षण पूर्ण कर पासिंग आउट परेड के उपरांत भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में नियुक्ति प्राप्त की। यह इस बात का प्रमाण है कि इस क्षेत्र की युवा प्रतिभाएँ अब हर क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छूने को तैयार हैं।
अतीत का गौरव, भविष्य की आवश्यकता
कोटा में विमानन प्रशिक्षण का इतिहास भी रहा है। पूर्व में यहाँ एनसीसी एयर विंग के कैडेट्स को उड़ान का प्रारंभिक अनुभव देने के लिए ग्लाइडर प्रशिक्षण दिया जाता था। इस लेख के लेखक ने भी वर्ष 1977 से 1980 के दौरान कॉलेज अध्ययन के समय एनसीसी एयर विंग के अंतर्गत ‘सी’ सर्टिफिकेट प्राप्त किया तथा 1979 में सोलो ग्लाइडिंग कर सिल्वर बैज के साथ – साथ ग्लाइडर पायलट लाइसेंस हासिल किया था।
समय के साथ विमानन तकनीक काफी आधुनिक हो चुकी है और अब अत्याधुनिक विमानों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है। किंतु वर्तमान में कोटा इस सुविधा से वंचित है।
निष्कर्ष
यदि लगभग 450 एकड़ में फैले पुराने एयरपोर्ट परिसर में एक आधुनिक फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित होता है, तो यह कोटा के लिए एक गेम-चेंजर सिद्ध हो सकता है। इससे न केवल एनसीसी कैडेट्स को आधुनिक प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि देश भर से कोटा आने वाले लाखों छात्रों तथा स्थानीय युवाओं के लिए भी एविएशन सेक्टर में करियर बनाने का नया अवसर उपलब्ध होगा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी की यह पहल यदि मूर्त रूप लेती है, तो वह दिन दूर नहीं जब कोटा देश के प्रमुख एविएशन ट्रेनिंग हब के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा।





