Friday, October 2, 2026
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कोटा में मधुकर काव्य सृजन संस्थान का मायड़ भाषा पर ” हाड़ौती साहित्यका जातरा- 2026 का आयोजन सम्पन्न

कोटा/ रेजोनेंस संस्थान में मधुकर काव्य सृजन संस्थान का मायड़ भाषा पर ” हाड़ौती साहित्यका जातरा- 2026 का आयोजन सम्पन्न । आयोजन का मंचस्थ अतिथियों द्वारा माँ शारदे के पूजन अर्चन से हुआ। माँ शारदे की सरस्वती वंदना हास्य कवि एवं गीतकार सुरेश पण्डित ने की। उसके पश्चात् मधुकर काव्य सृजन संस्थान के अध्यक अध्यक्ष जोधराज परिहार ” मधुकर ” ने कहा कि ” इस आयोजन की सफलता यह है कि हमारे दिवगंत साहित्यकारों के सृजन को जन जन तक पहुँचाना इस संस्था का उद्देश्य हैं। इस अवसर पर हाड़ौती अंचल के तीन दिवगंत साहित्यकारों के परिजनों का सम्मान किया गया जिसमें स्वं रघुराज सिंह हाड़ा झालावाड़ के सुपुत्र वरदान सिंह हाड़ा , डॉ शान्ति भारद्वाज राकेश’ की धर्मपत्नी श्रीमती कृष्णा भारद्वाज, स्वं गौरीशंकर कमलेश के सुपुत्र वरिष्ठ एडवोकेट सुरेन्द्र शर्मा को दिया गया, इस दिया गया, हाड़ौती अंचल के समीक्षक जितेन्द्र निर्मोही ने कहा कि “रघुराज सिंह हाड़ा के गीतों की रचनाप्रक्रिया को सामने रखा। उन्होंने कहा कि रघुराज सिंह हाड़ा ने हाड़ौती अंचल की राजस्थानी भाषा का एक युग बोध खड़ा किया वहीं वो हिंदी साहित्य में बच्चन की परिवर्तित श्रृंखला के महत्वपूर्ण गीतकार बने रहे। उन्होंने हाड़ौती अंचल की संस्कृति की पहचान दिलाई। उनके गीत लंदन के एलबर्ट हाल में गाये गये। रघुराज सिंह हाड़ा के सुपुत्र वरदान सिंह हाड़ा ने कहा कि “स्वं रघुराज सिंह जी हाडा ने जो कुछ लिखा वह देश दुनिया में सराहा गया। स्वं गौरीशंकर कमलेश के सुपुत्र सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि ” आजका यह आयोजन सराहनीय कदम है, जिसमें दिवंगत साहित्यकारों को याद किया गया है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् चित्तौड़ प्रांत के संरक्षक रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने कहा” कमलेश जी के साहित्य के बारे में विस्तार से बात करना संभव नहीं है। आपने, एकांत वास में बैठकर साहित्य साधना की है। स्वं कमलेश ने हाड़ौती अंचल के राजस्थानी साहित्य की आधार भूमि तैयार की उस पर वर्तमान के कवि खड़े हुए हैं। डॉ शान्ति भारद्वाज राकेश’ की धर्मपत्नी श्रीमती कृष्णा भारद्वाज ने कहा कि ” आपने हमें याद किया और हमें सम्मान डॉ शान्ति भारद्वाज राकेश’ को प्रदान किया, भारद्वाज परिवार का नहीं समस्त साहित्य समाज का सम्मान है। राजकीय महाविद्यालय पिढ़ावा के पूर्व प्राचार्य के बी भारतीय ने कहा कि ” डॉ भारद्वाज ने हाड़ौती अंचल के और राजस्थान के साहित्यकारों के बीच सेतु का काम किया है, उनमें कार्यो शास्त्रों में बहस करने का जज्बा था, हाड़ौती अंचल की राजस्थानी भाषा को लेकर विद्वानों के मध्य सेतु का काम किया। वो लोक सम्पृक्त कवि थे। उन्होंने छोटे से छोटे ग्राम्य अंचलों से लेखकों को खोजा और उन्हें सामने लाए। ” अध्यक्षता हाड़ौती अंचल के लोकप्रिय गीतकार प्रेम शास्त्री ने ” ल्यों संकल्प करां नै आपा, अपनी मायड़ भाषा थापा। अपणा आंगणा अपणा मांडणा, अपणी धूंणी तांपा। प्रेम शास्त्री ने मायड़ भाषा पर जब यह गीत पढ़ा तो उपस्थित श्रोताओं ने सराहा। आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यक्रम संयोजक तंवर सिंह तारज ने” यह मायड़ भाषा यात्रा हैं, यह मधुकर काव्य सृजन संस्थान की ओर से जारी रहेगी, युवा साहित्यकार हेमसिंह हेम ने कहा कि ” कोटा के साहित्यकारों ने आज यहाँ पधारकर हमें अनुग्रहित किया। आयोजन के प्रभारी रूपनारायण संजय ने रहें।

संचालन युवा व्यग्ंकार नहुष व्यास ने किया।

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