मोदी का मिशन ‘स्मार्ट इंडिया’: People, Planet और Progress के मंत्र से तकनीक की नई इबारत
कौशल विकास मंत्रालय का वादा: एआई से रोजगार छिनेंगे नहीं, बल्कि हुनर को मिलेंगे नए पंख_
✍️डॉ. नयन प्रकाश गांधी
भारत मंडपम में आयोजित होने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026’ की भव्यता: 70,000 वर्ग मीटर में फैले इस आयोजन में 600 से अधिक स्टार्टअप्स और 2.5 लाख से अधिक दर्शकों के जुटने की उम्मीद है।जब पूरी दुनिया सिलिकॉन वैली के ‘ChatGPT’ और ‘Llama’ पर निर्भर थी, तब भारत ने चुपचाप अपनी डिजिटल संप्रभुता की नींव रख दी।
इस एक्सपो में प्रधानमंत्री मोदी भारत का पहला सरकारी और स्वदेशी एआई मॉडलBharatGen’ (भारत-जेन) राष्ट्र को समर्पित करेंगे

आईआईटी बॉम्बे और ‘IndiaAI मिशन’ के तहत तैयार यह मॉडल केवल अंग्रेजी नहीं, बल्कि हिंदी, तमिल, राजस्थानी समेत 22 भारतीय भाषाओं की बारीकियों को समझता है। चाहे जैसलमेर का किसान हो या मदुरै का छात्र, अब एआई उनकी अपनी बोली में जवाब देगा। सबसे खास बात—यह विदेशी मॉडल्स की तरह महंगा नहीं, बल्कि आम भारतीयों के लिए सस्ता और सुलभ है। यह मॉडल सुनिश्चित करेगा कि भारत का डेटा विदेशी सर्वर पर नहीं, बल्कि देश के भीतर ही सुरक्षित रहे। यह केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि ‘डिजिटल गुलामी’ से ‘डिजिटल आजादी’ की ओर भारत का सबसे बड़ा कदम है। जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को केवल मशीनी बदलाव के चश्मे से देख रही है, तब भारत इसे सामाजिक परिवर्तन और समावेशी विकास के एक शक्तिशाली हथियार के रूप में परिभाषित कर रहा है। आगामी 16 फरवरी 2026 की शाम, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी के भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो’ का उद्घाटन करेंगे, तो वह केवल एक तकनीकी प्रदर्शनी का शुभारंभ नहीं होगा, बल्कि ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प की एक जीवंत झांकी होगी। ग्लोबल साउथ के सबसे बड़े एआई महाकुंभ के रूप में उभरता यह आयोजन दुनिया को यह संदेश देगा कि भारत की एआई क्रांति का केंद्र मशीनी दिमाग नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना है। यहाँ नीति व्यवहार से मिलेगी और नवाचार आम नागरिक की देहरी तक पहुँचेगा, जहाँ तकनीक का चेहरा डराने वाला नहीं, बल्कि हर हाथ को हुनर देने वाला होगा।
प्रधानमंत्री का विज़न: ‘कोडिंग’ के साथ ‘करुणा’ का संगम
्प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि तकनीक का असली मूल्य उसके शक्ति प्रदर्शन में नहीं, बल्कि आम आदमी के सशक्तिकरण में है। उन्होंने ‘इंडिया एआई मिशन’ की नींव इसी विचार पर रखी कि भारत को एआई का केवल खरीदार नहीं, बल्कि दुनिया को रास्ता दिखाने वाला देश बनना चाहिए। उनका सपना है कि एआई वैसी ही क्रांति लाए जैसी कभी यूपीआई (UPI) ने पैसों के लेनदेन में लाई थी। ₹10,300 करोड़ के निवेश और स्वदेशी ‘भारत-जेन’ जैसे मॉडल्स के साथ, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत की अपनी तकनीकी संप्रभुता हो। प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि एआई का अर्थ केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं, बल्कि ‘एस्पिरेटिंग इंडिया’ (आकांक्षी भारत) की नई उड़ान है।
इस महाकुंभ के चार मुख्य आकर्षण
लोग, ग्रह और उन्नति की त्रिवेणी: इस एक्सपो को तीन मुख्य विषयों पर बाँटा गया है। ‘लोग’ चक्र इंसान की भलाई पर, ‘ग्रह’ चक्र पर्यावरण की रक्षा पर और ‘उन्नति’ चक्र देश की आर्थिक प्रगति पर केंद्रित है। यहाँ 300 से अधिक लाइव प्रदर्शन दिखाए जाएंगे।
600 से ज्यादा स्टार्टअप्स का हुनर: यहाँ देश के ऐसे छोटे-बड़े स्टार्टअप्स हिस्सा ले रहे हैं जो असल ज़िंदगी की समस्याओं का हल निकाल चुके हैं। ये स्टार्टअप खेती से लेकर अस्पताल तक के काम को आसान बनाने वाले एआई टूल्स का प्रदर्शन करेंगे।
☝️13 देशों का साथ: भारत की मेजबानी में हो रहे इस आयोजन में ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे 13 देशों के विशेष पवेलियन होंगे। यह दिखाता है कि दुनिया अब तकनीकी नेतृत्व के लिए भारत की ओर देख रही है।
विशाल मंच और भागीदारी: 70,000 वर्ग मीटर में फैले इस आयोजन में 2.5 लाख से ज्यादा लोगों के आने की उम्मीद है। यहाँ 500 से ज्यादा सत्र होंगे जहाँ दुनिया भर के वैज्ञानिक और जानकार चर्चा करेंगे कि एआई को आम जनता के लिए कैसे सुरक्षित बनाया जाए।
कौशल विकास मंत्रालय: हाथ के हुनर को मिलेंगे नए पंख
इस एक्सपो में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) का एक खास पवेलियन होगा। केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी के नेतृत्व में मंत्रालय यह दिखाएगा कि एआई नौकरियां छीनने नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर बनाने आया है। इनका मंत्र तीन बातों पर टिका है:
🫵एआई में हुनर: युवाओं को एआई की बारीकियां सिखाना, ताकि वे नए ज़माने की नौकरियां पा सकें।
🫵एआई के साथ हुनर: ‘स्किल इंडिया असिस्टेंट’ जैसे टूल्स की मदद से छात्रों को उनकी पसंद और काबिलियत के हिसाब से करियर की सलाह देना।
🫵एआई के लिए हुनर: यह दिखाना कि कैसे एक बिजली मिस्त्री, एक बुनकर या एक राजमिस्त्री एआई का इस्तेमाल करके अपना काम ज्यादा तेजी और सफाई से कर सकता है।
भारत को एआई क्रांति की जरूरत क्यों है?
भारत एक विशाल देश है। यहाँ एआई कोई शौक नहीं, बल्कि जरूरत है। खेती में कब पानी देना है और कब खाद, यह एआई किसान को बता सकता है। दूरदराज के गाँवों में जहाँ डॉक्टर नहीं हैं, वहां एआई बीमारियों की पहचान कर सकता है। ‘भाषिणी’ जैसे टूल के जरिए एक तमिल बोलने वाला व्यक्ति हिंदी या बंगाली बोलने वाले से आसानी से बात कर सकता है। भारत चाहता है कि एआई कुछ खास कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि एक रेहड़ी-पटरी वाला भी इसका इस्तेमाल अपना व्यापार बढ़ाने में करे।
मशीनों में बसती मानवीय संवेदना
अंत में यही कहा जा सकता है कि यह एक्सपो भारत के लिए सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है। यह तकनीकी दुनिया में भारत के उदय का नया शंखनाद है। अब यह तकनीक सिर्फ बड़े शहरों के दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगी। अब यह राजस्थान के तपते खेतों में किसान की ‘परामर्शदाता’ बनेगी और गाँवों की ‘लखपति दीदी’ का हाथ थामकर उनके उत्पादों को दुनिया के बाज़ारों तक पहुँचाएगी।यह आयोजन दुनिया को सिखाएगा कि भारत का ‘डिजिटल इंडिया’ अब ‘समझदार और संवेदनशील भारत’ बन चुका है। यहाँ कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के पीछे सिर्फ गणित नहीं, बल्कि गरीब आदमी के लिए ममता है। यहाँ डेटा के पीछे सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि हर नागरिक के सम्मान की रक्षा का वादा है। भारत का यह प्रयास सिद्ध करता है कि ज्ञान और विज्ञान का असली लक्ष्य वही है जो हमारी प्राचीन संस्कृति सिखाती रही है। इसी मंगल कामना के साथ यह आयोजन मानवता के कल्याण का मार्ग खोलता है:”प्रौद्योगिकी न केवलं विकासस्य साधनं, अपितु लोककल्याणस्य मार्गः अस्ति।”
(यानी, प्रौद्योगिकी सिर्फ तरक्की का जरिया नहीं है, बल्कि यह लोगों की भलाई का सबसे बड़ा रास्ता है।)

डॉ. नयन प्रकाश गांधी ,युवा मैनेजमेंट विश्लेषक ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट





