-जितेंद्र कुमार शर्मा
बारां | अरावली पर्वतमाला की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को बचाने के उद्देश्य से अरावली विरासत बचाओ जन अभियान के तहत रविवार को बूंदी में एक महत्वपूर्ण संवाद बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, अवैध खनन तथा वन विनाश के बढ़ते खतरे पर गहन चिंता व्यक्त करते हुए शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां द्वारा अरावली बचाओ जनअभियान को अपना खुला समर्थन दिया गया ।
संवाद बैठक को संबोधित करते हुए प्रख्यात पर्यावरणविद् नीलम अहलूवालिया ने कहा कि अरावली पर्वतमाला देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो जल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय जीवन-यापन का आधार है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित विकास गतिविधियों के कारण अरावली का अस्तित्व गंभीर संकट में है। इसे रोकना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
कार्यक्रम में शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के संरक्षक प्रशांत पाटनी ने नीलम आहलुवालिया फाउंडर पीपुल्स फॉर अरावली का स्वागत करते हुए कहा कि “अरावली एवं शाहबाद क्षेत्र में जल स्रोतों का सूखना, भूजल स्तर का गिरना, वन्यजीवों के आवास का नष्ट होना तथा जलवायु असंतुलन जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भूमिका, युवाओं की सहभागिता तथा सशक्त जन-जागरूकता अभियान अत्यन्त आवश्यक है।
संवाद बैठक में चम्बल संसद के संयोजक बृजेश विजयवर्गीय और अखिल भारतीय गायत्री साधना आश्रम कोटा के यज्ञदत्त हाडा,सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने अपने विचार रखे तथा अरावली संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने प्रशासन से अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, वन संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की। द नाहर संस्था बूंदी द्वारा आयोजित
बैठक के अंत में अरावली विरासत बचाओ जन अभियान के तहत निरंतर संवाद, जनजागरण कार्यक्रम और जन आंदोलन को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
जिला प्रभारी विठ्ठल सनाढ्य ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया द नाहर संस्था के सचिव संजय खान ने कार्यक्रम का संचालन किया।






