कोटा/ देश की चिकित्सा व्यवस्था पर *हाडोती संभाग कोचिंग समिति (रजि.)* के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल समिति के संभागीय अध्यक्ष बुद्धिप्रकाश शर्मा के नेतृत्व में संभागीय आयुक्त महोदय (कोटा सम्भाग) से मिला और उन्हें महामहिम राष्ट्रपति जी और माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम एक ज्ञापन दिया।
समिति के मीडिया प्रभारी विशाल उपाध्याय ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की है कि वर्तमान में भारत सरकार ने नीट-पीजी की जो नई परिभाषा दी है उससे देश की चिकित्सा व्यवस्था को भारी नुकसान होने की संभावना है।
इस नई परिभाषा के अनुसार – 40% अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी चिकित्सा विशेषज्ञ बनेंगे जो देश की चिकित्सा व्यवस्था के लिये घातक होगा।
संभागीय महामंत्री धनेश विजयवर्गीय ने निम्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी है कि…
पहला- देश की आम जनता को इनसे चिकित्सा करवाने पर जान का खतरा होगा
दूसरा- इससे देश के विभिन्न प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के माध्यम से कई अमीर विद्यार्थी कम योग्यता के बावजूद पैसों के दम पर डिग्री हासिल कर लेंगे।
तीसरा- इसे मेधावी विद्यार्थियों को कम मौके मिलेंगे।
ज्ञापन में यह निम्न तर्क भी दिए गए–
1- क्या -40% वाले डॉक्टर से उनके स्वयं के परिजन भी इलाज करने की हिम्मत दिखाएंगे.!
2- क्या कोई भी माननीय मंत्रीजी ऐसे डॉक्टर को अपना घरेलू डॉक्टर बनाएंगे.!
3- क्या भारत के प्रशासनिक अधिकारी, कोई माननीय जज महोदय या कोई सेलिब्रिटी इन -40% योग्यताधारी डॉक्टर से अपना इलाज कराएंगे.!
4- क्या माननीय प्रधानमंत्री जी भी इनके इलाज पर भरोसा रख पाएंगे.!
यदि हां, तो उन सभी डॉक्टरों को जो माइनस 40% अंक से उत्तीर्ण होकर विशेषज्ञ बने हैं, देश के प्रमुख चिकित्सालय दिल्ली एम्स में नौकरी दी जानी चाहिए और देश के सभी राजनेता, प्रशसनीय अधिकारी, माननीय जज और सेलिब्रिटी अस्वस्थ होने पर (ईश्वर न करें वह अस्वस्थ हो) उनकी चिकित्सा इन्हीं 126 डॉक्टर की टीम से कराई जाए।
और यदि नहीं, तो फिर देश के आमजन को इन न्यूनशिक्षित डॉक्टर के हाथ मरने के करने के लिए छोड़ना उचित है क्या.?
श्री शर्मा ने बताया कि भारत सरकार ने 3 वर्ष पूर्व न्यायालय में इस परिभाषा को यह कहकर नकार दिया था की चिकित्सा जगत में आमजन की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। तो फिर अब सरकार किसके दबाव में देश की जनता को इन न्यून शिक्षित चिकित्सकों के हाथों मरवाना चाहती है।
साथ ही उस समय माननीय न्यायालय ने भी विद्यार्थियों की एक याचिका को यह करते हुए निरस्त कर दी थी की मेडिकल की शिक्षा, जीवन और मृत्यु से जुड़ी हुई है।
अतः ज्ञापन के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री जी और महामहिम राष्ट्रपति जी से आग्रह किया गया है कि इस नई परिभाषा को अभिलंब निरस्त करें और उन 126 न्यून शिक्षित विद्यार्थियों को चिकित्सा तंत्र से तुरंत बाहर करके मेधावी छात्रों को मौका देंवे ताकि देश की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मजबूत रहे।
प्रतिनिधिमंडल में सम्भागीय संरक्षक राकेश मिश्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओम मेहता, कोषाध्यक्ष नरेश नागर, समिति सदस्य वीरेंद्र शर्मा और राकेश नागर शामिल रहे।






