Tuesday, September 1, 2026
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विकल्प” सद्भावना समारोह में साहित्यकारों ने दिया प्रेम और भाईचारे का संदेश

कोटा” विकल्प “जन सांस्कृतिक मंच द्वारा मकर संक्रांति के अवसर पर प्रसिद्ध शायर शकूर अनवर के शिवपुरा स्थित प्रांगण में सद्भावना समारोह पूरी उमंग के साथ मनाया गया। उद्घाटन सत्र में कवियों और शायरों द्वारा खुले आकाश में हस्ताक्षर युक्त पतंगें और शांति के प्रतीक कबूतर छोड़ कर आज़ादी और भाई चारे का संदेश दिया गया।

प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर अनिता वर्मा ने कहा कि वर्तमान दौर में मानवीय मूल्यों की गिरावट साहित्यकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। उन्हें अपनी रचनाओं में प्रेमचंद की तरह समाज की सचाईयों और उच्च आदर्शों की स्थापना करनी होगी। साहित्य में वंचितों के प्रति प्रेम और निश्छलता की भाषा सुनाई देनी चाहिए। मुख्य अतिथि विजय सिंह पालीवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान साहित्य आत्म मुग्धता के सीमित दायरे में सिकुड़ गया है उसमें आम जन की ज़िंदगी की धड़कनें सुनाई नहीं देतीं। साहित्य को बाजारवाद से मुक्त होकर इंसानी संवेदनाओं को प्रमुखता देनी चाहिए।

संस्कृतिकर्मी शरद तैलंग ने अपने सद्भावना संदेश में कहा कि देश समाज में नफरत और अंधविश्वास के बढ़ने से युवा शक्ति का वास्तविक विकास रुक गया है। साहित्य ही इस अंधेरे से युवा पीढ़ी को मुक्त कर सकता है। प्रथम सत्र के विशिष्ट अतिथि कमर आब्दी ने कहा कि सद्भावना की दिशा में “विकल्प” द्वारा की गई पहल बहुत ही सराहनीय है। बिगुल जैन ने लेखकों को प्रकृति से जुड़ने का आह्वान किया।

प्रथम सत्र के अंत में शकूर अनवर की ग़ज़लों के फोल्डर “यह तो एक शहर रोशनी का था” लोकार्पित किया गया।

विशिष्ट अतिथि फ़ानी जोधपुरी ने अनवर की ग़ज़लों को इंसानियत के दर्द से लबरेज़ करुणा और जीवन संघर्ष की ग़ज़लें बताया।

दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी में नगर के प्रतिनिधि कवियों और शायरों ने अपनी कविताओं, गीतों और ग़ज़लों से समारोह को यादगार कार्यक्रम बना दिया। ग़ज़ल कार मयंक सोलंकी ने बगावत के स्वर व्यक्त करते हुए कहा ” कौन सुने दिल की आवाज़, बस्ती बस्ती जंगल राज”, बद्री लाल दिव्य ने अपने हाड़ौती व्यंग्य में कहा _” बदल्यो बदल्यो सौ दीखे छै म्हाने अब इंसान” डॉ. ज़ेबा फ़िज़ा ने पतंग के माध्यम से कहा _”ये साजिश हवा की थी या कोई और बात थी, क्यों उसके घर की सिम्त ही मेरा उड़ा पतंग” वेद प्रकाश “परकास ” की ग़ज़ल” ग़म मिला है ज़िंदगी को” ने समां बांध दिया। शकूर अनवर ने अपने लोकार्पित फोल्डर से कुछ ग़ज़लों के शेर पढ़े _” मुहब्बत में झमेले पड़ गए हैं, दिलों के बीच झगड़े पड़ गए हैं।

विशिष्ट अतिथि ओम कटारा ने विद्रोही तेवर का गीत पढ़ा। गोष्ठी में अतिथि शायर कमर आब्दी, सीमा तबस्सुम, महेन्द्र नेह,राजेन्द्र पंवार, डॉ. कृष्णा कुमारी, हलीम आईना, विजय राघव, गौरी शंकर सोनगरा, रफ़ीकुर्रहमान , राम करण प्रभाती, सुरेश पंडित, डॉ. शबाना सहर, नारायण शर्मा, अब्दुल सलाम हैरत, दिनेश राय द्विवेदी, फ़ानी जोधपुरी, सुरेश कुमार गौतम, दुर्गा शंकर बैरागी , किशन लाल वर्मा आदि कवियों ने काव्य गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की। गोष्ठी की अध्यक्षता रघुराज सिंह कर्मयोगी तथा संचालन चांद शेरी ने किया।

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