Tuesday, June 2, 2026
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भागवत कथा समाज को संस्कार और राष्ट्रबोध से जोड़ने का माध्यम : संत श्री गोविंद गिरी जी महाराज

अखिल नामा ,संवाददाता मयूर टाइम्स न्यूज

बारां/स्व. मुरलीधर साबू मेमोरियल ट्रस्ट एवं विष्णु साबू परिवार के तत्वावधान में 5 से 11 जनवरी तक आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के व्यास पीठाधीश्वर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास अयोध्या के कोषाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय संत श्री गोविंद गिरी जी महाराज ने आज श्रीराम जानकी मंदिर से शुभम रिसॉर्ट तक भव्य कलश यात्रा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समसामयिक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विषयों पर पत्रकारों के प्रश्नों के स्पष्ट और विचारोत्तेजक उत्तर दिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में युवाओं के पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ते झुकाव, देश में बढ़ते धर्मांतरण, तथा बड़े मंदिरों में शुल्क लेकर वीआईपी दर्शन जैसी व्यवस्थाओं पर प्रमुखता से सवाल पूछे गए।

युवाओं के पाश्चात्य संस्कृति की ओर अभिगमन पर

पत्रकारों द्वारा पूछे गए प्रश्न पर श्री गोविंद गिरी जी महाराज ने कहा कि

> “आज का युवा भटक नहीं रहा है, बल्कि उसे सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा। पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण हमारी जड़ों से हमें दूर कर रहा है। भारतीय संस्कृति जीवन जीने की कला सिखाती है, केवल उपभोग नहीं। भागवत कथा जैसे आयोजन युवाओं को आत्मबोध और संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं।”

उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का आह्वान किया।

देश में बढ़ते जा रहे

धर्मांतरण के विषय पर संत श्री गोविंद गिरी जी महाराज ने कहा कि ” धर्म की परिभाषा सभी जगह पर एक समान है।”

> “धर्म परिवर्तन आस्था का नहीं, बल्कि प्रलोभन और मजबूरी का परिणाम बनता जा रहा है। यह सामाजिक असंतुलन का कारण है। आवश्यकता इस बात की है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, सेवा और संस्कार पहुँचाए जाएँ, जिससे कोई भी अपने मूल धर्म से विमुख न हो।”

उन्होंने सेवा, समरसता और संवाद को इसका समाधान बताया।

बड़े मंदिरों में शुल्क लेकर

वीआईपी दर्शन को लेकर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि

> “ईश्वर के दरबार में कोई वीआईपी नहीं होता। दर्शन व्यवस्था में अनुशासन आवश्यक है, लेकिन धन के आधार पर भेदभाव उचित नहीं। मंदिरों को प्रबंधन और पारदर्शिता के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का केंद्र बनना चाहिए, न कि व्यवसाय का। यदि वी आई पी व्यवस्था से अर्जित धन का उपयोग मंदिरों द्वारा विकास या गरीबों के लिए किया जाता है तो कोई गलत बात नहीं है

भागवत कथा का सामाजिक उद्देश्य प्रश्न के उत्तर में

श्री गोविंद गिरी जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, सद्भाव और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का माध्यम है।

> “भागवत का संदेश है — मानवता, करुणा और कर्तव्य। जब समाज इन मूल्यों को अपनाएगा, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में आयोजक विष्णु साबू ,बजरंग साबू एवं सत्यप्रकाश साबू ने जानकारी दी कि 5 से 11 जनवरी तक प्रतिदिन कथा के साथ सांस्कृतिक व आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है ।

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