नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में भारत के संविधान को अंगीकार किए जाने के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित राष्ट्रीय समापन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह कार्यक्रम देशभर में चले ऐतिहासिक अभियान “हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान” के समापन का प्रतीक रहा।
इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल और आईजीएनसीए के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी भी मंचासीन रहे।
संविधान: भारत की सभ्यता की आत्मा — गजेंद्र सिंह शेखावत
अपने प्रेरणादायी मुख्य भाषण में मंत्री शेखावत ने संविधान को “भारत की सभ्यता की अभिव्यक्ति” बताते हुए कहा कि मौलिक अधिकारों, समानता और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार ने नागरिकों को अभूतपूर्व शक्ति और अवसर दिए।
उन्होंने आपातकाल जैसे निर्णायक दौरों को याद करते हुए कहा कि संविधान ने देश को हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों पर बनाए रखा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे “सक्रिय नागरिक” बनकर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करें।
दो महत्वपूर्ण प्रदर्शनी का उद्घाटन
मुख्य अतिथि ने आईजीएनसीए परिसर में दो विशेष रूप से क्यूरेटेड प्रदर्शनी का शुभारंभ किया—
“नींव – भारतीय संविधान की महिला शिल्पी”
दर्शनम गैलरी में लगी यह प्रदर्शनी संविधान सभा की उन अग्रणी महिलाओं को समर्पित रही, जिन्होंने भारत के संविधान की बुनियाद को आकार दिया।
“भारत का संविधान निर्माण – 75 वर्ष की गाथा”
इसमें संविधान निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा, दुर्लभ अभिलेख, तस्वीरें, ऐतिहासिक बहसें और प्रमुख पड़ावों को विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया गया।
संविधान निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा का पुन: स्मरण
कार्यक्रम में अपने वक्तव्य के दौरान सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने 1946 से 1950 तक चली संविधान निर्माण प्रक्रिया, संविधान सभा की चर्चाएँ, डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व और मूल सुलेखित संविधान की कलात्मक विरासत पर प्रकाश डाला।
उन्होंने वर्षभर चले “हमारा संविधान–हमारा स्वाभिमान” अभियान के तहत देशभर में हुए प्रस्तावना वाचन, प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक पहल का भी उल्लेख किया।
सांस्कृतिक उत्सव का भव्य आयोजन
समवेत सभागार में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत “वंदे मातरम” के सामूहिक गायन से हुई। प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने स्वागत उद्बोधन में संविधान को लोकतांत्रिक मूल्यों की धुरी बताया।
इस अवसर पर संविधान@75 पर आधारित एक स्मारक फिल्म और “भारतीय संविधान में कला एवं सुलेख” पर निर्मित लघु फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसे आज ही संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. (डॉ.) अलका चावला और आईजीएनसीए के डॉ. सुधीर लाल ने संविधान में निहित न्याय, समानता और गरिमा के मूल्यों पर विचार व्यक्त किए।
राष्ट्रीय संकल्प का संदेश
समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
संस्कृति मंत्रालय ने सभी सहभागी संस्थानों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और नागरिकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि संविधान@75 समारोह ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरो दिया।
मंत्रालय ने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने और जागरूकता बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।






